जयराम बोले-आज तक नहीं की बदले की कार्रवाई, विपक्ष के हंगामे पर जताई नाराजगी
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मानसून सत्र के दूसरे दिन भी विपक्ष के हंगामे पर सत्ता पक्ष ने तीखी नाराजगी व्यक्त की। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से लेकर संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज और सिंचाई मंत्री महेंद्र सिंह ने विपक्ष की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए जनता के पैसे का दुरुपयोग न करने की सलाह तक दे डाली।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वह सरकार बनने के पहले दिन से आज तक बदले के तहत कोई कार्रवाई न करने के फैसले पर अडिग हैं। कानूनी प्रक्रिया के तहत ही मामलों पर कार्रवाई हो रही है।
भारद्वाज ने कहा कि शराब माफिया पर कार्रवाई होने पर विपक्ष को हंगामा नहीं करना चाहिए। अपील की कि विपक्ष इस कार्रवाई को प्रतिष्ठा का सवाल बनाने के बजाय आम जनता के हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा में भाग ले।
दरअसल, मंगलवार को सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष हंगामा और नारेबाजी करता रहा। प्रश्नकाल खत्म होते ही विपक्ष ने वाकआउट कर दिया। चूंकि इसके बाद प्रदेश में बाढ़ और भारी बारिश से तबाही पर चर्चा होनी थी जिसकी मांग ज्यादातर विपक्ष के विधायकों ने की थी।
लेकिन चर्चा के समय एक भी सदस्य मौजूद नहीं था। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया लेकिन संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज ने विपक्ष के इस रवैये पर आपत्ति जताई।
कहा कि सारा प्रदेश बाढ़ की चपेट में है और दो दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। लेकिन विपक्ष को हिमाचल के लोगों के बजाय शराब माफिया की चिंता है। सीएम ने कहा कि विपक्ष की बात सुनने के बाद ही सीआईडी के आईजी या मंडलायुक्त स्तर तक से जांच कराने का आश्वासन दिया।
लेकिन एक विधायक के पीएसओ और चालक की गलत हरकत को प्रतिष्ठा का सवाल बनाकर आम जनता के हित के समय को खराब करना बेहद गलत परंपरा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 11 दिन का सत्र है जिसमें दो दिन सिर्फ व्यक्तिगत अहम की भेंट चढ़ गए हैं।
कहा कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रहते मेरे भी पीएसओ के खिलाफ मामला दर्ज हुआ लेकिन हमने उसे प्रतिष्ठा का सवाल नहीं बनाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लड़कर और अड़कर रहना ठीक नहीं होता।
वीरभद्र के इशारे पर मुझे बकरे की तरह उठा ले गई थी पुलिस: महेंद्र सिंह
विपक्ष के रवैये से नाराज महेंद्र सिंह ने कहा कि इस मामले में तो विपक्ष के किसी विधायक पर एक खरोच तक नहीं आई। लेकिन कांग्रेस का विधायक रहते हुए मेरे ही विधानसभा क्षेत्र से तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के इशारे पर पुलिस ने मुझे भरे मंच से उठा लिया था।
यही नहीं बकरे की तरह मुझे हाथ पैर पकड़कर ले गई और मेरी पिटाई की। लेकिन तब न तो उस समय के मुख्यमंत्री ने माफी मांगी और न ही किसी एसपी, डीसी का निलंबन हुआ।
कहा कि यह विपक्ष की आपसी लड़ाई का नतीजा है जिसमें कोई नेता प्रतिपक्ष को नीचा दिखाना चाहता है तो कोई अपने को आगे दिखाने में जुटा है। कहा कि यहां तो पुलिस ने अपराधियों पर कार्रवाई की।
इसके बाद भी एसपी के निलंबन की मांग कर रहे हैं। कहा कि छह बार के सीएम और वरिष्ठ नेता अपने विधायकों को समझाएं ताकि वह जनता के पैसे और समय की बरबादी न करें।