विश्व पर्यावरण दिवसः सीएम जयराम ने की 7 बड़ी घोषणाएं, विद्यार्थियों को दिया ये तोहफा
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विश्व पर्यावरण दिवस पर सीएम जयराम ठाकुर ने पर्यावरण संरक्षण के लिए सात बड़ी घोषणाएं की। सीएम ने मंडी जिले के राजकीय पालिटेक्निक महाविद्यालय सुंदरनगर में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह की अध्यक्षता की।
सीएम ने कहा कि हमारे दैनिक जीवन में पर्यावरण की रक्षा करने तथा प्लास्टिक के उपयोग की गंभीरता का एहसास करने तथा प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक करने के लिये एक आह्वान है।
उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस पृथ्वी की सुरक्षा के प्रति कुछ करने के लिए ‘लोगों का दिन’ है। कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस महज़ एक औपचारिक अवसर नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे कुछ न कुछ ठोस परिणाम सामने आने चाहिए।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने राजकीय पॉलिटैक्निक सुंदरनगर में 1.50 करोड़ रुपये के अतिथि गृह तथा 5.58 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले मैकेनिकल इंजीनियरिंग खंड भवन की आधारशिलाएं रखीं।
सीएम ने कहा कि जंगलों में आग से वनस्पति और वन्य प्राणियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसे देखते हुए फैसला लिया है कि जंगलों को आग से बचाने के लिए हिमाचल में चल रहे सीमेंट उद्योगों को 0.1 प्रतिशत चीड़ की पत्तियां ईंधन के तौर पर प्रयोग करनी होंगी।
उन्होंने कचरे के वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण के लिए राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में 1 से 2 टन क्षमता वाले 10 ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र स्थापित करने की भी घोषणा की। सुंदरनगर, घुमारवीं शहरों के लिए पॉलिथीन शैडर मशीनें प्रदान की जाएंगी।
पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाने वाला हिमाचल पहला राज्य
हिमाचल हाईकोर्ट के आदेश पर वर्ष 2009 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने पॉलिथीन बैग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। इसी देखादेखी में देश के अन्य राज्यों में भी पॉलिथीन पर रोक लगाई गई।
प्रदेश में दूध-दही और कुछ जरूरी चीजों को छोड़कर पॉलिथीन पर पूर्ण प्रतिबंध है। आदेशों के बाद कुछ दिन तो दिक्कत हुई, लेकिन अब लोग कागज के लिफाफों और जूट-कपड़े के बैग के आदी हो गए हैं। इससे हिमाचल में पर्यावरण प्रदूषण रोकने को बल मिला।
प्रदूषण को कम करने वाले पेड़ पौधे उगाए जाएंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। तत्कालीन धूमल सरकार ने प्लास्टिक लिफाफों पर प्रतिबंध लगाकर प्रदेश को स्वच्छ बनाने की जो मुहिम शुरू की थी उसे अब यह सरकार आगे बढ़ाएगी।
उन्होंने चिंता जाहिर की कि प्लास्टिक की एक बोतल को मिट्टी में गलने में 70 साल का समय लग जाता है। पानी पीने के लिए अब छोटी बोतलों व प्लास्टिक कप का प्रयोग हो रहा है जो और अधिक पर्यावरण को दूषित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की नर्सरियों में प्रदूषण को कम करने वाले पेड़ पौधे उगाए जाएंगे ताकि इन्हें लोगों को पौधरोपण के लिए वितरित किया जा सके।उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने उद्योग विभाग को चिलारू का उचित उपयोग के लिए इकाई स्थापित करने की परियोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
सरकारी स्कूल के प्रत्येक विद्यार्थी को स्टील की बोतल
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने एलान किया कि हिमाचल सरकार जल्द ही थर्मोकोल से बने कप-गिलास और प्लेटों के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाएगी। सार्वजनिक और सरकारी समारोहों में पानी की एक लीटर से कम क्षमता वाली प्लास्टिक बोतलों-कपों पर भी रोक लगाई जाएगी।
प्लास्टिक और थर्मोकोल का प्रयोग सरकारी समारोहों में न हो, इसे भी सुनिश्चित किया जाएगा। मंडी जिले के राजकीय बहुतकनीकी कॉलेज सुंदरनगर में विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण कम
करने के लिए प्रदेश में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को नि:शुल्क स्टेनलेस स्टील की बोतलें दी जाएंगी। ये बोतलें मुख्यमंत्री वर्दी और पुस्तक योजना के तहत चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध करवाई जाएंगी। उन्होंने आर्थिक रूप से सक्षम अभिभावकों से आह्वान किया कि वे बच्चों को स्कूल के लिए प्लास्टिक की जगह स्टील की बोतल खरीद कर दें।
10 ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र स्थापित होंगे
सीएम ने कहा कि कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए राज्य के विभिन्न भागों में 10 ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। सुंदरनगर तथा घुमारवीं शहरों के लिए पॉलिथीन शैडर मशीन प्रदान की जाएगी।
उन्होंने परिसर में पौधे का रोपण किया तथा विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रकाशन को भी जारी किया। उन्होंने इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण पर प्रचार पोस्टर भी जारी किया।
आठ शहरों के लिए ‘पापा’ अभियान शुरू
मुख्यमंत्री ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रदूषण उपशमन पौध अभियान (पापा) का भी शुभारंभ राजकीय बहुतकनीकी कॉलेज में पौधरोपण कर किया।
इस अभियान के तहत प्रदेश के प्रदूषित 8 शहरों बद्दी, नालागढ़, परवाणू, कालाअंब, पांवटा साहिब, सुंदरनगर, डमटाल और ऊना में 5 जून से पहली जुलाई 2018 तक 4 लाख औषधीय पौधे रोपे जाएंगे। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से लगाई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।