जनता के लिए हेली टैक्सी सेवा शुरू कर खुद सड़क पर मुख्यमंत्री
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जनता के लिए हेली टैक्सी सेवा शुरू करने के बाद सीएम जयराम ठाकुर खुद सड़क से सफर करने को मजबूर हैं। शुक्रवार को भी उन्हें करसोग के कुनहू हेलीपैड से सड़क मार्ग से शिमला आना पड़ा। इसकी वजह यह रही कि हेलीकॉप्टर को तकनीकी जांच के लिए वापस चंडीगढ़ भेजना पड़ा।
ऐसा कई बार हो चुका है। इसके अलावा पायलट की तय मासिक ड्यूटी जल्द पूरी हो रही है। यानी, तय समय तक ही पायलट हेलीकॉप्टर चला सकते हैं। बाकी उन्हें विश्राम करना होता है। इससे भी इस हेलीकॉप्टर में सीएम के सफर के घंटे घट गए हैं।
जबसे सीएम की ओर से इस्तेमाल किए जाने वाले पवन हंस हेलीकॉप्टर से हेली टैक्सी सेवा शुरू की गई है, तबसे इसकी सर्विस और तकनीकी जांच का काम भी बढ़ गया है। शुक्रवार को हेली टैक्सी की शिमला से चंडीगढ़ के लिए आम लोगों के लिए सेवा थी।
इसके बाद पौने 11 बजे हेलीकॉप्टर सुंदरनगर आया। सुंदरनगर से सीएम करसोग के कुन्हू हेलीपैड पहुंचे, पर उन्हें कार्यक्रमों को निपटाने के बाद जब शाम को शिमला आना था तो हेलीकॉप्टर में तकनीकी खामी आने की बात की गई। यह वापस चंडीगढ़ चला गया। सीएम को वाया तत्तापानी सड़क मार्ग से शिमला आना पड़ा।
अनाडेल में हेली टैक्सी की लैंडिंग में सुरक्षा का पेच
सीएम ने अनाडेल मैदान में जुलाई से हेली टैक्सी की लैंडिंग की बात की थी। इस बारे में डीजीसीए और अन्य एजेंसियों से अब तक पूरी तरह सुरक्षा क्लीयरेंस नहीं मिलने से ये पेच फंसा हुआ है।
हेलीकॉप्टर से लोगों के उतरते समय भी सुरक्षा चेकिंग का एक तय प्रोटोकॉल अनाडेल मैदान में ठीक वैसा नहीं है, जैसा कि जुब्बड़हट्टी मेें है। इस वजह से भी दिक्कत आ रही है, जबकि यहां केवल लैंडिंग ही होनी थी।
दूसरे हेलीकॉप्टर से ही सुधर सकती है व्यवस्था- सीएम के दौरों के लिए अगर सरकार दूसरे हेलीकॉप्टर का प्रबंध कर पाई तो इसी से व्यवस्था में सुधार हो सकता है। हालांकि, सरकार पर इससे आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा, इसलिए सरकार इस हालत में नहीं है कि इस दिशा में फिलहाल विचार कर सके। अधिकारियों के स्तर पर इसकी संभावनाओं पर चर्चा ही चल रही है।