पहले सुक्खू से निपट लें वीरभद्र सिंह, फिर करें हमें छेड़ने की बात: जयराम
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पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के जुबानी हमले के बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के तेवर भी आक्रामक हो गए हैं। सीएम का कहना है कि वीरभद्र सिंह उन्हें अब तक नहीं छेड़ने की बात कर रहे हैं, लेकिन वो यह जान लें अभी तक उन्हें भी नहीं छेड़ा गया है। तंज कसते हुए कहा कि पहले वीरभद्र सिंह उन्हीं की पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सुक्खू से तो निपट लें।
उसके बाद किसी से छेड़ने की बात करें। सचिवालय में अमर उजाला से विशेष बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता स्थापित मानसिकता को नहीं बदल पा रहे हैं।
अनुभव की बात करने वाले कांग्रेसी नेताओं को यह जान लेना चाहिए कि पार्टी के सबसे युवा प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर जयराम ठाकुर की अगुवाई में ही भाजपा ने प्रदेश में कांग्रेस को सत्ता से बाहर किया था। सीएम ने कहा कि वह भाजपा के वरिष्ठ नेताओं शांता कुमार, जेपी नड्डा और प्रेम कुमार धूमल के साथ काम कर चुके हैं।
भ्रम में हैं अग्निहोत्री
वीरभद्र सरकार का भी उन्होंने कामकाज देखा है। अब उन्हें नई भूमिका मिली है। भाजपा सरकार ने पांच महीने के अल्पकाल में अभूतपूर्व कार्य किए हैं। छोटे से समय में केंद्र से 4378 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट सूबे के लिए मंजूर करवाए हैं। कांग्रेस नेताओं को यह सब नजर ही नहीं आ रहा है। वे एक स्थापित मानसिकता से निंदा राग छेड़े हुए हैं।
आज जमीनी हकीकत कुछ और है। जयराम ठाकुर ने कहा कि जनता के चाहने के बाद ही वह मुख्यमंत्री के पद पर हैं और लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने को प्रयास कर रहे हैं। जनता के इस रिस्पांस को विरोधियों को भी खुले मन से स्वीकार कर लेना चाहिए।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री खुद को बड़ा नेता मानने का भ्रम पाले हुए हैं। उनके शब्द हिमाचली संस्कृति से मेल नहीं खाते हैं। ऐसी ही कई वजहों से अग्निहोत्री की कांग्रेस के ही लोगों में स्वीकार्यता नहीं है।
हिमाचल में नेताओं से अफसरों की टैगिंग का दौर खत्म
हिमाचल में नेताओं के साथ अफसरों की टैगिंग का दौर खत्म हो चुका है। यह दावा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने किया है। एक केंद्रीय नेता और हिमाचल के एक अन्य बड़े नेता से सचिवालय के अधिकारियों के जुड़े होने की चर्चाओं को विराम लगाते हुए सीएम बोले- सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद सरकारी ढांचे की कार्यशैली के साथ अफसरों की मानसिकता बदल गई है।
पहले ये चर्चाएं रहती थीं कि यह उस सीएम का आदमी है या पुराने मुख्यमंत्री का आदमी है, लेकिन भाजपा ने सत्ता में आने के बाद यह सोच बदल दी है। जयराम बोले- मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के कुछ अरसे तक अफसरशाही को लेकर भले ही कुछ दिक्कतें आईं, लेकिन दो-तीन महीने में सब कुछ ठीक कर दिया है।
अब कोई नहीं कहता, ये उस सीएम का अफसर वह उस सीएम का अफसर
मुख्यमंत्री जयराम अमर उजाला से विशेष बातचीत में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सचिवालय में अफसरों को सही जगह फिट कर दिया है। सरकार पर किसी का दबाव नहीं है। न दिल्ली और न ही संगठन का सरकार में हस्तक्षेप हो रहा है। सचिवालय में अफसरों को जो जिम्मेदारी दी गई है, वे उसे बखूबी निभा रहे हैं।
पहले पुरानी मानसिकता वाले अफसर अफवाहें फैलाते थे कि वह अधिकारी उस समय के मुख्यमंत्री के साथ काम करता था, इसलिए उसे उस सीट पर नहीं बैठाया जाना चाहिए। अब अफसर इससे आगे बढ़कर काम कर रहे हैं।
सीएम ने कहा कि पांच महीने के छोटे से कार्यकाल में अधिकारियों ने बेहतरीन काम किया है। इसी के परिणामस्वरूप वे केंद्र से हजारों-करोड़ों के प्रोजेक्टों को मंजूरी दिलाने में सफल रहे हैं।