फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   City's drinking water supply being disrupted by silt from the Sunni Project.

Shimla News: सुन्नी प्रोजेक्ट की सिल्ट से ठप हो रही शहर की पेयजल आपूर्ति

Thu, 13 Aug 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2026 11:59 PM IST
विज्ञापन
City's drinking water supply being disrupted by silt from the Sunni Project.
प्रोजेक्ट की सिल्ट से सतलुज पेयजल योजना में गाद आने से शहर के लिए नहीं हो पा रही पानी की पंपिंग, मेयर ने सरकार को लिखा पत्र
विज्ञापन

शिमला की पेयजल आपूर्ति के लिए बताया गंभीर खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सतलुज नदी में सुन्नी जलविद्युत परियोजना के निर्माण कार्य से बढ़ रही सिल्ट से शिमला शहर के लिए बन रही सबसे बड़ी पेयजल योजना पर खतरा मंडरा रहा है। नगर निगम शिमला ने इसको लेकर चिंता जताते हुए प्रदेश सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की है।
नगर निगम के मेयर सुरेंद्र चौहान ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को इस बारे में पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने 382 मेगावाट सुन्नी हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट से निकल रही अत्यधिक सिल्ट को शिमला की पेयजल आपूर्ति के लिए गंभीर खतरा बताया है। निगम के अनुसार परियोजना का बांध स्थल शिमला बल्क वाटर सप्लाई स्कीम के इंटेक और जैकवेल से करीब चार से पांच किलोमीटर ऊपर की ओर स्थित है। बांध स्थल पर बड़े पैमाने पर खोदाई, मलबा निकलने और निर्माण गतिविधियों के कारण नदी में भारी मात्रा में सिल्ट, महीन मिट्टी और खोदाई की सामग्री पहुंच रही है। नगर निगम के अनुसार निर्माण गतिविधियों के कारण कच्चे पानी में तलछट की मात्रा असामान्य रूप से बढ़ गई है। इसका असर शिमला बल्क वाटर सप्लाई स्कीम के इंटेक तक पहुंचने वाले पानी पर भी पड़ रहा है। कई बार नदी का पानी गाद के कारण लगभग कीचड़ जैसा दिखाई देता है। यह समस्या केवल निर्माण अवधि तक सीमित रहने की आशंका नहीं है।
विज्ञापन


नगर निगम महापौर ने पत्र में लिखा है कि शिमला बल्क वाटर सप्लाई स्कीम राज्य की राजधानी के लिए पेयजल के प्रमुख स्रोतों में से एक है। इसके बाधित होने या लंबे समय तक बंद रहने का सीधा असर शहर के लोगों के साथ अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, सरकारी कार्यालयों, व्यावसायिक क्षेत्रों और पर्यटकों पर पड़ेगा। ऐसी स्थिति में सार्वजनिक स्वास्थ्य, प्रशासनिक व्यवस्था और आर्थिक गतिविधियों पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। मौजूदा पेयजल योजना नदी में सामान्य और ऐतिहासिक रूप से मौजूद सिल्ट लोड को ध्यान में रखकर डिजाइन की थी। निर्माण गतिविधियों के कारण वर्तमान में पहुंच रही असामान्य रूप से अधिक सिल्ट की मात्रा योजना के हाइड्रोलिक, मैकेनिकल और जल उपचार संबंधी डिजाइन में परिकल्पित नहीं थी।
विज्ञापन
विज्ञापन



हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के बांध से उठाएं पानी : चौहान
महापौर सुरेंद्र चौहान ने समस्या के स्थायी तकनीकी समाधान के तौर पर सुन्नी हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के बांध से पानी उठाने की व्यवस्था करने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि बांध के न्यूनतम ड्रॉडाउन लेवल के आसपास से अपेक्षाकृत साफ पानी लिया जा सकता है और पर्याप्त क्षमता वाली अलग पाइपलाइन के माध्यम से इसे शकरोड़ी स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के प्री-सेडिमेंटेशन टैंकों तक पहुंचाया जा सकता है। न्यूनतम ड्रॉडाउन लेवल पानी का वह न्यूनतम सुरक्षित स्तर है जिस तक पानी को पंप कर निकाला जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article