टेक्नोमैक घोटाला: सीआईडी ने कंपनी मालिक पर कसा शिकंजा
प्रदेश के सबसे बड़े टेक्नोमैक घोटाले की जांच कर रही सीआईडी ने कंपनी के प्रबंध निदेशक राकेश शर्मा पर शिकंजा कस दिया है। स्थानीय कोर्ट में चार्जशीट दाखिल होने के बाद सीआईडी ने राकेश शर्मा का पासपोर्ट निरस्त करने के लिए विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा है।
पत्र में शर्मा को घोटाले का मुख्य आरोपी बताकर चार्जशीट दायर करने की दलील दी गई है। क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी दिल्ली के माध्यम से भेजे गए इस पत्र के बाद शर्मा की मुश्किलें बढ़ना तय हैं।
सूत्रों की मानें तो चूंकि आरोपी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल हो गई है, ऐसे में पासपोर्ट निरस्त होना लगभग तय है। पासपोर्ट निरस्त हो या कुछ समय के लिए सस्पेंड किया जाए, दोनों ही सूरत में शर्मा को देश लौटना ही होगा।
ऐसा इसलिए है क्योंकि पासपोर्ट निरस्त होने की कार्रवाई दुनिया भर में भारत के दूतावासों व दूसरे देशों को भी दे दी जाती है। इसके बाद पासपोर्ट धारक पासपोर्ट का उपयोग किसी भी देश की यात्रा के लिए नहीं कर सकता।
कुंडू ने दिए थे कार्रवाई के निर्देश
वहीं, जिस देश में वह वर्तमान में हैं, वहां की सरकार भी शर्मा को सीधे भारत डिपोट कर सकती है। बता दें कि सीआईडी ने हाल ही में शर्मा समेत आठ लोगों के खिलाफ नाहन कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। आरोप है कि इन्होंने सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलकर सरकार को 2100 करोड़ का नुकसान पहुंचाया।
साथ ही करीब दस करोड़ रुपये का बिजली बोर्ड को बिल चुकाने में भी फ्रॉड किया है। फिलहाल मामले में अभी भी तफ्तीश जारी है और कई आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जांच एजेंसी प्रयास कर रही है।
कुछ दिन पहले ही प्रधान सचिव विजिलेंस संजय कुंडू ने मामले की जांच की समीक्षा की थी। कर चोरी के मुख्य मामले के अलावा बिजली चोरी के मामले में तो गिरफ्तारी व चार्जशीट दाखिल हो गई है।
लेकिन बैंकों से लिए लोन की जांच में समय लग रहा है। जिसके बाद समीक्षा के दौरान कुंडू ने जांच अधिकारियों को 30 जून तक मामले की जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं।