बर्फ और बारिश से सेब को मिले चिलिंग ऑवर्स, पेड़ों में आई जान
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हिमाचल प्रदेश में बर्फ और बारिश से सेब के पेड़ों को कुछ और चिलिंग ऑवर्स मिल गए हैं। इससे सेब के पेड़ों में जान आ गई है। वर्तमान में सेब के पौधों को रोपने और तौलिये करने के लिए भी जमीन में अच्छी नमी है। इससे भी सेब बागवान उत्साहित हैं।
लंबे समय से बागवान इस बात से चिंतित थे कि अगर यही हाल रहा तो सेब के पेड़ों के लिए वांछित चिलिंग ऑवर्स पूरे नहीं हो पाएंगे। अब कुछ और चिलिंग ऑवर्स मिल जाने से बागवान ये उम्मीद कर रहे हैं कि मार्च तक ये पूरे हो सकते हैं।
सेब की रॉयल फसल के लिए करीब 1600 से 1800 चिलिंग ऑवर्स और स्पर फसलों के लिए लगभग 600 से 800 ऐसे घंटे चाहिए होते हैं। तभी आने वाले समय में सेब की अच्छी फसल हो सकती है।
चिलिंग ऑवर्स से अभिप्राय सात डिग्री सेल्सियस के तापमान में सेब के पेड़-पौधों के रहने से है। बागवानों ने काफी संख्या में सेब के पौधे भी एकत्र कर रखे हैं। इन्हें लगाने के लिए जमीन में गड्ढे करने की जरूरत होती है। अब इस काम के लिए भी जमीन में नमी आ गई है।
इसके अलावा सेब के पेड़ों के चारों तरफ मिट्टी को नरम किया जाता है, जिससे पेड़ ठीक से खाद और दवा को ग्रहण कर सकें। इस काम को तौलिये बनाना कहते हैं। इस काम के लिए भी जमीन में काफी नमी है।
नेपाल से भी काफी संख्या में मजदूर खुदाई का काम करने को आए हैं। उन्हें भी काम मिल गया है। प्रधान सचिव बागवानी जेसी शर्मा ने भी बर्फ और बारिश को सेब बागवानी के लिए अच्छा माना है।
गेहूं और सब्जियों को मिली संजीवनी
हिमाचल में ताजा बारिश गेहूं, चना और सब्जियों की फसल के लिए भी अच्छी है। सूखे की स्थिति में फसलें सूखने लग गई थीं, मगर अब फिर से हरियाली लौटने लगी है। इससे किसानों के चेहरों पर छाई मायूसी अब मुस्कराहट में बदलने लगी है।
लंबे सूखे के बाद बीते दिनों हुई बारिश से प्रदेश में बड़े स्तर पर गेहूं की बिजाई करने वाले किसान खुश हैं। कुछ किसानों को सूखे की स्थिति में ही गेहूं की बिजाई करनी पड़ी। इसके बाद लंबे समय से गेहूं के बीज ठीक से अंकुरित नहीं हो पाए।
जो दाने उगे, वे भी धूप और गरमी में नमी की कमी के कारण सूखने लग गए थे। अब ये हरे-भरे होने लगे हैं। यही हाल चने की फसल के हैं। सब्जियों में भी मटर, गोभी और अन्य फसलें सूखे के कारण मुरझाने लगी थीं।
कई क्षेत्रों मेें सिंचाई की व्यवस्था होने के बावजूद तेज धूप का सब्जियों पर गलत असर पड़ने लगा था। ये बीमारियों की चपेट में आने लगी थीं। मौजूदा बारिश इनके लिए अच्छी है।
कृषि विभाग के पूर्व अतिरिक्त निदेशक एवं खेतीबाड़ी के विशेषज्ञ डा. एचआर शर्मा ने भी बारिश को फसलों के लिए अच्छा माना। उन्होंने कहा कि थोड़े वक्त के लिए इससे नमी जरूर आएगी। उम्मीद है कि आगे भी इससे ठीक बारिश होगी।