विपक्ष के भारी विरोध के बीच मुख्य सचेतक विधेयक विधानसभा में पारित
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विपक्ष के विधायकों और माकपा विधायक ने मुख्य सचेतक बिल का खूब विरोध किया। हिमाचल प्रदेश विधानसभा मुख्य सचेतक और उपमुख्य सचेतक का वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाएं विधेयक 2018 को भारी हंगामे के बाद वीरवार को पारित कर दिया गया।
विपक्ष दो विधायकों की मुख्य सचेतक और उपमुख्य सचेतक के पदों पर नियुक्ति और इन्हें कैबिनेट मंत्रियों के बराबर सुविधाएं देने को अलोकतांत्रिक बताता रहा। अधिकतर विधायकों का कहना था कि इस तरह की नियुक्तियां अलोकतांत्रिक हैं।
यह ऑफिस ऑफ प्रोफिट के दायरे में आएंगी, मगर सत्ता पक्ष ने एक नहीं सुनी। मुख्यमंत्री और संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्टीकरण दिया कि कई बाहरी राज्यों में भी इस तरह के प्रावधान किए गए हैं। यह व्यवस्था लोकतांत्रिक है।
राकेश सिंघा ने विधेयक के पारण को अनावश्यक बताया
बाद में सत्ता पक्ष ने हां में हां मिलाई और बिल ध्वनिमत से पारित हो गया। विधेयक पर विपक्ष ने चर्चा की मांग की थी। प्रश्नकाल के बाद चर्चा हुई। पहले ठियोग से माकपा विधायक राकेश सिंघा ने विधेयक के पारण को अनावश्यक बताया।
कहा कि इस पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए। बाद में कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री, शिलाई के कांग्रेस विधायक हर्षवर्द्धन चौहान और शिमला ग्रामीण के कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह ने विरोध किया।
इसके बाद पांवटा के भाजपा के विधायक सुखराम चौधरी ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए विधेयक का समर्थन किया। डलहौजी की विधायक आशा कुमारी और नयनादेवी के विधायक रामलाल ठाकुर ने भी बिल के विरोध में चर्चा में हिस्सा लिया।
बरागटा और धवाला को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने की तैयारी
मुकेश अग्निहोत्री ने विधेयक के कानूनी पहलुओं पर बात करते हुए कहा, मुख्य सचेतक और उप मुख्य सचेतक के लिए यह व्यवस्था संवैधानिक तरीके से ही की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने गुजरात, उड़ीसा, बिहार, तेलंगाना, दिल्ली, मिजोरम, त्रिपुरा आदि राज्यों मेें भी ऐसे प्रावधान की बात कही। इसके बाद सीएम ने सदन मेें इस विधेयक को पारित करने का प्रस्ताव रखा।
सत्तापक्ष ने यह बिल ध्वनिमत से पारित कर दिया। माना जा रहा है कि इस बिल को पारित करने के बाद सरकार ने पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा और रमेश धवाला को एडजस्ट करने की बुनियाद तैयार कर ली है।
बिल को पारित करने के बाद इसे राज्यपाल आचार्य देवव्रत को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलते ही दोनों को मुख्य सचेतक और उप मुख्य सचेतक की नियुक्तियां दी जा सकती है। इन्हें कैबिनेट मंत्री के बराबर की सुविधाएं दी जाएंगी।
फल विधायन केंद्र को धन उपलब्ध करवाने का प्रयास
बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार प्रगतिनगर में फल विधायन केंद्र (प्रोसेसिंग यूनिट) स्थापित करने का प्रयास करेगी। धन उपलब्ध कराने को किसी भी एजेंसी से मामला उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि एचपीएमसी के इस प्लांट का शिलान्यास 22 सितंबर, 2012 में किया गया।
बजट उपलब्ध न होने से इसका निर्माण कार्य नहीं हो पाया। फल विधायन केंद्र के लिए बजट उपलब्ध करवाने को एचपीएमसी की चेन्नई में 17 करोड़ 3 लाख में जमीन बेची गई। इस राशि से कर्मचारियों की देनदारियां को निपटाया गया।
मंत्री ने यह जानकारी जुब्बल कोटखाई के विधेयक नरेंद्र बरागटा के प्रश्न के उत्तर में दी। उन्होंने कहा कि भविष्य में सरकार हिमाचल के जिन क्षेत्रों में फल होता है, वहां ऐसी इकाइयां लगाने का प्रयास करेगी। सरकार ने अपने 3 माह के कार्यकाल में कई प्रयास किए हैं।
पूर्व सरकार ने आवंटित किए थे 15 करोड़
महेंद्र सिंह ने कहा कि पूर्व सरकार ने 15 करोड़ आवंटित किए थे, लेकिन उस राशि को डायवर्ट कर दिया गया। प्लांट के लिए अपीडा, एचटीएम और केंद्र से मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि परवाणू तक बागवानों से खरीदे गए सेब को पहुंचाने में कई तरह की दिक्कतें आती हैं।