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बैंकों के चक्रव्यूह में फंस गई मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना

Thu, 14 Mar 2019 05:00 AM IST
Krishan Singh अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला
अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 14 Mar 2019 05:00 AM IST
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Chief Minister Swavalamban scheme stuck in the maze of banks in himachal

हिमाचल के बेरोजगार युवाओं को उद्यमी बनाने के लिए आरंभ की मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना बैंकों के चक्रव्यूह में फंस गई है। साल 2018-19 में योजना के तहत आए 803 आवेदनों में से 788 लाख के सिर्फ 36 आवेदनों को ही मंजूरी मिली है।

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बुधवार को शिमला में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की 151वीं बैठक में यह खुलासा हुआ। बताया गया कि 2956 लाख की सब्सिडी के 689 आवेदन बैंकों में ही लंबित हैं। प्रदेश सरकार ने योजना के तहत साल 2018-19 में 80 करोड़ बजट का प्रावधान रखा है, जिसमें अभी केवल 1.34 करोड़ ही खर्च हो पाए हैं।
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बेरोजगारों को स्वावलंबी बनाने के लिए जयराम सरकार ने मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना शुरू की है। इसमें नया उद्योग स्थापित करने के  लिए 40 लाख के ऋण पर 25 फीसदी (महिलाओं को 30 फीसदी) सब्सिडी का प्रावधान है।

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तीन साल तक ब्याज पर भी 5 फीसदी तक छूट दी गई है लेकिन बैंकों की जटिल औपचारिकताओं के चलते पात्र युवा इस योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।

आरबीआई से उठाएंगे मामला : अग्रवाल

Chief Minister Swavalamban scheme stuck in the maze of banks in himachal

मुख्य सचिव बीके अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि गाइड लाइन की अनदेखी करते हुए बैंक प्रबंधन ऋण लेने के लिए आए युवाओं को अतिरिक्त औपचारिकताओं में उलझा रहे हैं।

प्रोसेसिंग फीस अधिक होने के चलते युवा योजना को लेकर हतोत्साहित हो रहे हैं। सहकारी बैंक योजना के तहत ऋण देने के लिए पात्र नहीं है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के युवा आवेदन भी नहीं कर पा रहे हैं।

मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना का पात्र लोगों को लाभ न मिलना चिंता विषय है। योजना सुचारु तौर पर चलाने के लिए बैंकों के साथ उद्योग विभाग के अधिकारी नियमित तौर पर बैठक करेंगे। बैंकों से संबंधित समस्याओं को रिजर्व बैंक इंडिया के समक्ष प्रदेश सरकार उठाएगी। अगर बैंक भी योजना के तहत कुछ बदलाव चाहते हैं तो उनके सुझावों पर मंथन किया जाएगा।
- बीके अग्रवाल, मुख्य सचिव

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