{"_id":"9e7cd23c7bab3704bcbf5f9c7693ea25","slug":"cfl-lab-of-himachal-will-be-modernised","type":"story","status":"publish","title_hn":"हिमाचली जांच एजेंसियों के लिए अच्छी खबर, पढ़ें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिमाचली जांच एजेंसियों के लिए अच्छी खबर, पढ़ें
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Wed, 23 Jul 2014 01:04 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब किसी भी रिकार्डिंग में किसी कथित अपराधी की वॉयस सैंपल की जांच हिमाचल में ही संभव होगी। यही नहीं, राज्य फोरेंसिक साइंस लैब जुन्गा में अब साइबर अपराध के सबूतों की जांच भी होगी।
विज्ञापन
यानी हिमाचल की जांच एजेंसियों को अब राज्य से बाहर की चंडीगढ़, हैदराबाद आदि की प्रयोगशालाओं पर निर्भर नहीं रहना होगा। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने यह ऐलान मंगलवार को शिमला में हिमाचल प्रदेश फोरेंसिक विज्ञान विकास बोर्ड की आठवीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए किया।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह कहा कि शुरुआत में इस तकनीक को फोरेंसिक विज्ञान मुख्यालय जुन्गा में शामिल किया जाएगा। बाद में धर्मशाला और मंडी में स्थापित क्षेत्रीय केंद्रों में इसे शुरू किया जाएगा। वीरभद्र सिंह ने स्वर पहचान एवं डिजीटल तकनीकी को अपनाने पर बल दिया, क्योंकि जांच में डिजीटल साक्ष्यों से अधिक पुष्ट हो जाती है।
विज्ञापन
आपराधिक अभियोजन के क्षेत्र में फोरेंसिक विज्ञान की भूमिका महत्वपूर्ण है, जिससे अपराधियों को कानूनी तौर पर दंडित किया जा सके। कई अपराध अनसुलझे रह जाते हैं और आधुनिक डिजीटल तकनीकी के अभाव में अपराधी कई बार सजा से बच जाते हैं। न्यायालय में जांच और प्रस्तुतीकरण के लिए दिए गए साक्ष्य यदि उच्च स्तर के हों तो जांचकर्ताओं को भी भरोसा होगा।
उन्होंने साइबर फोरेंसिक डिविजन को भी सुदृढ़ करने की जरूरत पर बल दिया। बोर्ड ने राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला तथा क्षेत्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में डिजास्टर विक्टिम आइडेंटीफिकेशन सेल स्थापित करने को मंजूरी प्रदान की। इसी दौरान राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला जुन्गा में वायस आइडेंटिफिकेशन डिवीजन तथा डिजीटल फॉरेंसिक डिविजन जैसी दो नई विशेषज्ञताओं को देने की स्वीकृति प्रदान की।