पीएम मोदी ने हिमाचल को दिया बड़ा झटका
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योजना आयोग खत्म होने के कारण केंद्रीय मदद बंद होने के बाद अब केंद्र सरकार ने हिमाचल को एक और झटका दिया है। अगले वित्त वर्ष से भारत सरकार ने केंद्र प्रायोजित कृषि और बागवानी योजनाओं की ग्रांट में 50 फीसदी तक कटौती कर दी है। स्कीमों में अलग-अलग कटौती की गई है। जिन योजनाओं में केंद्र से 90:10 के अनुपात में ग्रांट मिलती थी, उसे पचास फीसदी कर दिया है। यानी इन योजनाओं का आधा खर्च प्रदेश सरकार को उठाना होगा। केंद्र की ओर से इस संबंध में हिमाचल सरकार को चिट्ठी मिल गई है।
हिमाचल का विशेष श्रेणी राज्य का दर्जा प्राप्त होने की वजह से केंद्रीय प्रायोजित स्कीमों में 90 :10 और 80:20 के अनुपात में ग्रांट मिलती थी। योजना आयोग का स्वरूप खत्म होने के बाद केंद्र सरकार ने अब इन योजनाओं के फंडिंग पैट्रन में भी बदलाव कर दिया है। केंद्र से मिले पत्र के अनुसार कृषि-बागवानी की जिन योजनाओं के लिए केंद्र सरकार 90 फीसदी ग्रांट देती थी, उसे कम कर 50 फीसदी कर दिया है।
अब और बढ़ीं हिमाचल की मुश्किलें
कई और स्कीमों में भी ग्रांट में कटौती की गई है। ये कितनी है, यह अभी साफ नहीं हो पाया है। केंद्र के पत्र के बाद पहले से ही आर्थिक संकट में जूझ रहे हिमाचल की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। केंद्रीय मदद के सहारे विभिन्न योजनाएं चला रही प्रदेश सरकार में खलबली मच गई है।
ये हैं केंद्र प्रायोजित योजनाएं- बागवानी तकनीकी मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय सूक्ष्म सिंचाई मिशन, फसल बीमा योजना।
2015-16 के लिए प्रस्तावित बजट
कृषि=======450 करोड़
बागवानी=====268 करोड़