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केंद्र के एक पत्र ने बढ़ा दी प्रदेश सरकार की मुश्किलें, मांगी ये जानकारी

Tue, 27 Mar 2018 12:34 PM IST
प्रखर दीक्षित, अमर उजाला, शिमला
प्रखर दीक्षित, अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 27 Mar 2018 12:34 PM IST
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centre govt seeks record of monkeys killed in himachal pradesh

केंद्र के एक पत्र ने प्रदेश सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दिसंबर 2017 में शिमला नगर निगम क्षेत्र और 38 तहसीलों में बंदरों को वर्मिन घोषित करने के बाद से अब तक मारे गए बंदरों की जानकारी मांगी है। केंद्र ने यह पत्र ऐसे समय में लिखा है, जब प्रदेश सरकार ने सूबे की 53 अन्य तहसीलों में भी बंदरों को वर्मिन घोषित करने की मांग की है।

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पूर्व कांग्रेस सरकार ने केंद्र से शिमला नगर निगम क्षेत्र समेत 39 शहरों में बंदरों को वर्मिन घोषित करने की मांग की थी। केंद्र ने भी एक साल के लिए बंदरों को वर्मिन घोषित कर दिया। मियाद के दौरान एक भी बंदर मारे जाने की जानकारी सामने नहीं आई। विस चुनाव से पहले वर्मिन की मियाद खत्म हो गई तो सरकार ने फिर वर्मिन घोषित करने को पत्र लिख दिया।
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दिसंबर में केंद्र ने फिर 39 शहरों में बंदरों को एक साल के लिए वर्मिन घोषित कर दिया। इस बीच, सरकार ने 53 और तहसीलों व उप तहसीलों में बंदरों को वर्मिन घोषित करने की मांग कर दी। इसके बाद केंद्र ने प्रदेश वन विभाग से दिसंबर से अब तक वर्मिन घोषित होने के बाद की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। दरअसल, पिछले तीन महीने में अधिकारिक रूप से एक भी बंदर मारे जाने की सूचना नहीं है। 

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हजारों किसान-बागवान छोड़ चुके हैं किसानी-बागवानी

centre govt seeks record of monkeys killed in himachal pradesh

प्रदेश के हजारों किसान-बागवान बंदरों के आतंक से किसानी-बागवानी छोड़ चुके हैं। सरकार बंदर के हमले के घायलों को पचास लाख से ज्यादा बतौर मुआवजा दे चुकी है।

तेरह साल में सरकार इस समस्या से निपटने के करीब दस करोड़ से ज्यादा खर्च कर चुकी है। सवा लाख से ज्यादा बंदरों की नसबंदी करने का भी दावा किया जाता रहा है। हालांकि, बंदरों की समस्या अब भी जस की तस है।

ईको टास्क फोर्स को देने की थी बंदर मारने की तैयारी
वन्यजीव अधिनियम के चलते वन विभाग बंदरों को खुद नहीं मार सकता। इसलिए वीरभद्र सरकार के दौरान गठित एक हाई पावर कमेटी ने तय किया था कि अगर पंचायत या किसान-बागवान आवेदन करें तो ईकोे टास्क फोर्स बंदरों को मारने में मदद कर सकती है। इस हाई पावर कमेटी में वर्तमान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर उस समय बतौर सदस्य शामिल थे। 

अन्य राज्यों ने की है केंद्र से मांग
केंद्र ने हिमाचल से वर्मिन पर स्टेट रिपोर्ट इसलिए मांगी है, क्योंकि बड़ी संख्या में वन्यजीव संगठन इसके औचित्य पर सवाल उठा रहे हैं। कई अन्य राज्यों ने भी बंदरों को वर्मिन घोषित करने के लिए आवेदन किया है। ऐेसे में सरकार यह जानना चाह रही है कि हिमाचल में वर्मिन घोषित करने का परिणाम क्या रहा है।

फील्ड से मांगी विभाग ने रिपोर्ट
प्रदेश के मुख्य वन्यजीव वार्डन डॉ. आरसी कंग ने केंद्र से पत्र मिलने की पुष्टि की है। कहा कि सभी डीएफओ को पत्र लिखकर रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद विस्तृत रिपोर्ट केंद्र को भेजी जाएगी।

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