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टूट गया शिमला के 300 परिवारों के घर का सपना
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Wed, 03 Sep 2014 10:46 AM IST
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शिमला के कृष्णानगर वार्ड के सैकड़ों परिवारों को बड़ा झटका लगा है। वार्ड को स्लम फ्री करने वाली राजीव आवास योजना को फारेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिली है। केंद्र सरकार ने वन भूमि को आवास बनाने के लिए न देने की बात कहते हुए नगर निगम के आवेदन को रद्द कर दिया है।
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वन मंत्रालय ने आवास बनाने के लिए किसी अन्य जगह गैर वन भूमि तलाशने को कहा है। वार्ड में झुग्गी-झोपड़ियों की जगह 300 पक्के मकान बनाने की योजना है। राजीव गांधी आवास योजना के तहत कृष्णानगर को शहर का मॉडल वार्ड बनाने के लिए 34 करोड़ स्वीकृत हुए हैं।
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नौ करोड़ की पहली किस्त नगर निगम को प्राप्त भी हो चुकी है। पायलट परियोजना के अंतर्गत 300 मकानों का निर्माण प्रस्तावित है, जिनमें से 224 मकान रहने के लिए और 76 किराये पर दिए जाएंगे। इसके अलावा सामुदायिक केंद्र में सामुदायिक सभागार, औषधालय, वृद्ध देखभाल गृह, पुस्तकालय, क्रच, सोलर लाइटों और सोलर हीटिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने की बात कही गई है।
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अब दूसरे स्थान की तलाश
फारेस्ट क्लीयरेंस के लिए वन विभाग के नोडल ऑफिसर अजय शर्मा ने नगर निगम के आवेदन को रद्द करने की पुष्टि की है। अजय शर्मा ने बताया कि वन मंत्रालय आवास बनाने के लिए वन भूमि पर निर्माण की अनुमति नहीं देता है। उधर, निगम आयुक्त अमरजीत सिंह का कहना है कि इस मामले को दोबारा केंद्र सरकार को भेजेंगे। वन भूमि के अलावा अन्य स्थानों का चयन करने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने किया था शिलान्यास
31 अगस्त 2013 को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कृष्णानगर वार्ड में राजीव आवास योजना का शिलान्यास किया था। योजना की डीपीआर बनाते समय नगर निगम ने वन मंत्रालय की गाइड लाइन की अनदेखी की है। मंत्रालय का कहना है कि आवास बनाने के लिए कभी भी वन भूमि को नहीं दिया जा सकता। निगम ने अगर इस गाइड लाइन का ध्यान रखा होता तो केंद्र सरकार ने फारेस्ट क्लीयरेंस को रिजेक्ट नहीं करता।