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'केंद्र सरकार की वजह से बढ़ रही है प्राइवेट स्कूलों में फीस'

Fri, 13 May 2016 09:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 13 May 2016 09:05 AM IST
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center govt is responsible for fee hike in private schools.
राइट टू एजूकेशन के तहत पर्याप्त बजट उपलब्ध न होने के चलते निजी स्कूलों में फीस बढ़ रही है। - फोटो : अमर उजाला

देश के निजी स्कूलों में बढ़ रही फीस के लिए केंद्र सरकार को दोषी ठहराया गया है। वीरवार को राजधानी शिमला के कालीबाड़ी हाल में आयोजित हिमाचल प्रदेश प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की बैठक में कहा गया कि राइट टू एजूकेशन के तहत पर्याप्त बजट उपलब्ध न होने के चलते निजी स्कूलों में फीस बढ़ रही है। बैठक की अध्यक्षता नेशनल इंडिपेंडेंस स्कूल अलाइंस के अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने की।

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उन्होंने बताया कि आरटीई के तहत हर निजी स्कूल को 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को दाखिला देना अनिवार्य किया गया है। योजना के तहत 65 प्रतिशत बजट केंद्र सरकार देती है जबकि 35 प्रतिशत बजट निजी स्कूल को देना पड़ता है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार अपने हिस्से का बजट नहीं दे रही है। इस कारण देश के कई राज्यों में आरटीई लागू नहीं हो पाया है। हिमाचल में इसे लागू तो किया गया है।
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लेकिन केंद्र सरकार का बजट नहीं मिल रहा। जिसका खामियाजा अन्य बच्चों को अधिक फीस देकर भुगतना पड़ रहा है। कुलभूषण शर्मा ने कहा आरटीई को लेकर सरकार की नीति ही स्पष्ट नहीं है। गरीबी की क्या परिभाषा है? 25 प्रतिशत दाखिला किन बच्चों को देना है? पड़ोसी स्कूल का दायरा कितना होगा? इसको लेकर कोई भी स्पष्ट आदेश नहीं हैं। इस कारण योजना सही तरीके से लागू नहीं हो रही है।
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उन्होंने कहा कि प्रदेश से मेरिट में आने वाले 80 से 90 प्रतिशत बच्चे निजी स्कूलों से होते हैं। फिर भी सरकारें निजी स्कूलों के कामकाज में अड़ंगा डाल रही हैं। बैठक के दौरान इन मामलों को लेकर सरकार के समक्ष उठाने का फैसला लिया गया। बैठक में एडवोकेसी एसोसिएशन से थामस एंटनी, प्रधान चंडीगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन प्रदीप शुक्ला, रवि आजटा प्रधान जिला शिमला प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन, एमपी शर्मा जिला सचिव और हेमंत सिंह कंवर जिला मीडिया सचिव सहित कई अन्य मौजूद रहे।


नए शिक्षकों पर ही लागू हो टेट की शर्त
बैठक के दौरान निजी स्कूलों के शिक्षकों पर लगाई गई टेट अनिवार्यता की शर्त को लेकर भी चर्चा की गई। कहा गया कि निजी स्कूलों में तैनात कई शिक्षकों की आयु 45 साल से अधिक है। ऐसे में इस समय टेट क्वालीफाई करना मुमकिन नहीं है। संघ ने सरकार से नई नियुक्तियों में टेट अनिवार्यता की शर्त को लगाने की मांग की।

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