सीमेंट विवाद: दाड़लाघाट और बरमाणा ट्रक यूनियनों के आंदोलन के समर्थन में चार जिले आए आगे
प्रदेश में सीमेंट विवाद थम नहीं रहा। अब दाड़लाघाट और बरमाणा ट्रक यूनियनों के 4 फरवरी के प्रस्तावित आंदोलन में चार जिलों सिरमौर, सोलन, बिलासपुर और ऊना के ट्रक ऑपरेटर भी समर्थन के लिए आगे आ गए हैं।
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हिमाचल प्रदेश में सीमेंट विवाद थम नहीं रहा। अब दाड़लाघाट और बरमाणा ट्रक यूनियनों के 4 फरवरी के प्रस्तावित आंदोलन में चार जिलों सिरमौर, सोलन, बिलासपुर और ऊना के ट्रक ऑपरेटर भी समर्थन के लिए आगे आ गए हैं। दोनों क्षेत्रों के ट्रक ऑपरेटर राज्य सरकार पर दबाव बनाने के लिए अब शिमला, कुल्लू और कांगड़ा के ट्रक यूनियनों से भी संपर्क बना रहे हैं। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के साथ मंगलवार को सीमेंट विवाद को लेकर दोनों पक्षों की होने वाली वार्ता टल गई है। आंदोलनरत ट्रक मालिकों का धैर्य भी अब जवाब देने लगा है।
ट्रक यूनियनों के साझा मंच के सदस्य और बाघल लैंड लूजर सोसाइटी के पूर्व अध्यक्ष रामकृष्ण शर्मा ने कहा कि जिला सिरमौर, सोलन, बिलासपुर और ऊना के ट्रक मालिकों का दाड़लाघाट और बरमाणा ट्रक मालिकों को समर्थन मिल गया है। इन जिलों के ट्रक मालिक भी 4 फरवरी के आंदोलन में हिस्सा लेंगे। इस संबंध में चारों जिलों के ट्रक यूनियनों के प्रतिनिधियों ने वर्चुअल बैठक की और इसमें सहमति भी हो गई है। उनका कहना है कि अन्य जिलों के ट्रक मालिकों से भी बातचीत की जा रही है, ताकि आंदोलन को विस्तार दिया जा सके। रामकृष्ण शर्मा का कहना है कि राज्य सचिवालय में मंगलवार दोपहर बाद 3:00 बजे सीएम ने ट्रक मालिक और प्रबंधन वर्ग को बुलाया था, लेकिन यह बैठक नहीं हो पाई।
4 जनवरी को दो घंटे पूरे हिमाचल में ऑपरेटर करेंगे चक्का जाम
एसीसी सीमेंट फैक्ट्री बंद होने के 49 दिन बाद भी सीमेंट विवाद का समाधान नहीं निकला है। ऑपरेटरों के सब्र का बांध टूट रहा है। मंगलवार को ऑल इंडिया रोड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स, ट्रांसपोर्ट महासंघ ने वर्चुअल बैठक कर निर्णय लिया कि चार फरवरी को सुबह 11 से दोपहर 1:00 बजे तक पूरे प्रदेश में दो घंटे चक्का जाम करेंगे। ऑल इंडिया रोड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स हिमाचल इकाई एवं बीडीटीएस के अध्यक्ष लेख राम वर्मा ने बताया कि एसीसी और अंबुजा सीमेंट फैक्ट्री के बंद होने से ऑपरेटरों और इस व्यवसाय से जुड़े हर व्यक्ति के घर में बच्चों की फीस, उनकी स्कूल की गाडिय़ों का किराया देना भी मुश्किल हो गया है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि इस व्यवसाय से जुड़े लोगों के घरों में रोजी रोटी पर बन आई है। लेकिन प्रदेश सरकार मामला शांत करने की सिर्फ मध्यस्थता कर रही है।
सरकार का काम मध्यस्थता करना नहीं, मामले का समाधान कर फैक्ट्री को खुलवाना है। इसमें अभी तक सरकार नाकाम रही है। कहा कि अब ऑपरेटरों का सब्र टूट चुका है। मंगलवार को आयोजित ऑल इंडिया रोड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स, ट्रांसपोर्ट महासंघ के पदाधिकारियों ने वर्चुअल बैठक की। इस बैठक में महासंघ के अध्यक्ष नरेश गुप्ता, एडीएमके के पूर्व प्रधान बालक राम, रामकृष्ण शर्मा, सरदार नागर,सतीश गोगी और विजय शर्मा विशेष रूप में मौजूद रहे। बैठक में तय हुआ कि अगर चार फरवरी सुबह तक सीमेंट फैक्ट्री के ताले नहीं खुलते हैं और किराया सही नहीं मिलता है तो सुबह 11:00 से दोपहर 1:00 बजे तक पूरे प्रदेश में चक्का जाम किया जाएगा। इस दिन से ही प्रदेश में बड़े आंदोलन का आगाज होगा, जो तब तक नहीं रुकेगा, जब तक सीमेंट विवाद नहीं सुलझ जाता। दूसरी तरफ उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने ऑपरेटरों को आश्वासन दिया कि जल्द समस्या का समाधान किया जाएगा। सीएम के वापस आने पर बैठक होगी, जिसमें बीडीटीएस भी शामिल होगी।