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नौकरी से वंचित युवाओं ने कर्मचारी चयन आयोग के खिलाफ खोला मोर्चा

Fri, 29 Nov 2019 05:03 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 29 Nov 2019 05:03 PM IST
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candidates protest outside hpssc office in hamirpur
- फोटो : अमर उजाला

वन टाइम रिलेक्सेशन (ओटीआर) के लिए जूनियर ऑफिस असिस्टेंट पोस्ट कोड-556 के रिजेक्ट अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नौकरी से वंचित बेरोजगार अभ्यर्थी अपने हितों की रक्षा के लिए प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। शुक्रवार को अभ्यर्थियों ने आयोग कार्यालय के बाहर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वर्तमान में लागू आरएंडपी नियमों ने इन्हें नौकरी से वंचित कर दिया है।

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अभ्यर्थियों ने कहा कि इस वर्ग के करीब 2400 अभ्यर्थियों का भविष्य संकट में है। आरएंडपी रूल्स में केवल सरकारी संस्थान के कंप्यूटर डिप्लोमा को ही मान्यता दी गई है। हायर एजूकेशन और सोसायटी से किए गए डिप्लोमा को रिजेक्ट कर दिया गया है। इससे पहले हुई पोस्ट कोड-447 के तहत जेओए भर्ती में प्राइवेट, सोसायटी डिप्लोमा और डिग्री धारकों को मौका दिया गया था।
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पोस्ट कोड-556 में रिजेक्ट अभ्यर्थियों ने खाली बचे पदों पर ओटीआर देने की मांग की है। अभ्यर्थियों ने कहा कि अगर सरकार ने मांग नहीं मानी तो वे अनशन पर बैठ जाएंगे। मांग की कि पोस्ट कोड-556 में वेटिंग लिस्ट भी जारी की जाए। खाली बचे पदों पर वन टाइम रिलेक्सेशन के तहत रिजेक्ट अभ्यर्थियों की मेरिट के आधार पर मौका दिया जाए।
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अभ्यर्थियों का कहना है कि पोस्ट कोड-556 का मामला दो वर्षों से न्यायालय के विचाराधीन था। 29 अगस्त, 2019 को अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय ने दे दिया है, लेकिन केवल सरकारी संस्थानों से कंप्यूटर डिप्लोमा को ही मान्यता दी है। न्यायालय ने खाली बचे पदों के लिए अंतिम निर्णय सरकार पर छोड़ा है।


उनका कहना है कि प्राइवेट तथा सोसायटी संस्थान कंप्यूटर शिक्षा का काम कर रहे हैं, वे भी सरकार की अनुमति से ही संचालित किए जा रहे हैं। यदि ये सरकार से मान्यता प्राप्त नहीं हैं तो इतने वर्षों से प्रदेश में शिक्षा का प्रसार कैसे कर सकते हैं। उधर, कर्मचारी आयोग के चेयरमैन ब्रिगेडियर सतीश कुमार ने कहा कि ओटीआर का निर्णय प्रदेश सरकार लेगी। अभ्यर्थियों का ज्ञापन सरकार को भेज दिया जाएगा।

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