अब पांच साल बाद हो सकेगी सीएंडवी शिक्षकों की घर वापसी
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प्रदेश के विभिन्न जिलों में नियुक्त सीएंडवी शिक्षकों को गृह जिले में आने के लिए अब 13 साल का इंतजार नहीं करना होगा। जयराम सरकार दूसरे जिले में सेवाएं देने की अवधि को पांच साल करने जा रही है।
बुधवार को शिक्षा निदेशालय में हुई बैठक में सीएंडवी शिक्षक संघ की मांग पर शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने इस पर सहमति जताई है। एक फीसदी स्थानांतरण कोटा भी पांच फीसदी करने की हामी भरी है।
संभावित है कि जल्द इस बाबत अधिसूचना जारी होगी। यह मांग पूरा होने से 18 हजार सीएंडवी शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी। संघ के प्रदेश अध्यक्ष चमन लाल शर्मा ने बताया कि सीएंडवी का जिला कैडर है। सरकार ने शिक्षकों की नियुक्ति करते समय पांच जिलों का विकल्प दिया था।
गृह जिला में वापसी को पहली नियुक्ति वाले स्कूल में न्यूनतम 13 साल सेवाएं देने की शर्त रखी है। इसे पूरा करना मुश्किल हो रहा है। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने 13 साल की शर्त को पांच साल करने की सहमति दी है।
बैठक में शिक्षा सचिव डॉ. अरुण शर्मा, निदेशक रोहित जम्वाल, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत शर्मा, संयुक्त निदेशक हितेश आजाद, राज्य परियोजना निदेशक आशीष कोहली, संघ के प्रदेश
महासचिव राकेश संदल, मुख्य सलाहकार दुर्गा नंद, चत्तर सिंह सूर्यवंशी, सुरेंद्र, कमल चंद, नरेंद्र, कश्मीर शर्मा, प्रहलाद चंद, रमन सहोड तथा गोविंद ठाकुर मौजूद रहे।
बैठक में 21 सूत्रीय मांग पत्र पर चर्चा
चमनलाल शर्मा ने बताया कि बैठक में संघ के 21 सूत्रीय मांग पत्र पर चर्चा हुई। मंत्री ने ऐसे अध्यापकों जो डीएलएड कर रहे हैं, उन्हें शीघ्र छुट्टियों का प्रावधान करने का आश्वासन दिया है।
नए सत्र से प्रदेश के सभी आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में फाइन आर्ट की कक्षा शुरू करने, शास्त्री तथा भाषा अध्यापकों को टीजीटी पदनाम देने के लिए मामला दोबारा वित्त विभाग को भेजने, क्राफ्ट, संगीत तथा गृह विज्ञान अध्यापकों को ग्रेड पे देने का मामला वित्त विभाग को भेजने की हामी भरी है।
सीएंडवी शिक्षकों का माध्यमिक स्कूलों में युक्तिकरण नहीं किया जाएगा। बीते दिनों निदेशालय ने 100 बच्चों से कम संख्या वाले स्कूलों से सीएंडवी को हाई स्कूलों में स्थानांतरित करने का फैसला लिया था। संघ के विरोध के बाद अब सरकार ने माध्यमिक स्कूलों में सीएंडवी अध्यापकों का युक्तिकरण नहीं करने का फैसला लिया है।
संघ के अध्यक्ष ने बताया कि प्रदेश में 2250 मिडल स्कूलों में से मात्र 27 स्कूलों में बच्चाें की संख्या 100 से अधिक है। मामले को मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से उठाने के बाद सरकार ने युक्तिकरण नहीं करने का फैसला लिया है।