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धर्मशाला में गद्दी और युवा कार्ड से कांग्रेस, कपूर-शांता सभी को साधा

Mon, 30 Sep 2019 11:47 AM IST
अरविन्द ठाकुर सुनील चड्ढा, अमर उजाला, धर्मशाला
सुनील चड्ढा, अमर उजाला, धर्मशाला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 30 Sep 2019 11:47 AM IST
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bye elections in dharamshala and CM jairam thakur strategy for candidates
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर (फाइल फोटो)

धर्मशाला उपचुनाव की टिकट तय करने में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और संगठन मंत्री पवन राणा की ही चली। विशाल नैहरिया को अंतिम समय में तुरुप का पत्ता बनाकर मुख्यमंत्री ने एक साथ कई निशाने साधे। 30 वर्षीय विशाल नैहरिया को उम्मीदवार बनाकर कांग्रेस के गद्दी और युवा कार्ड की काट निकाली। बेटे को टिकट न मिलने से नाराज किशन कपूर भी अब गद्दी उम्मीदवार पर कूटनीतिक रूप से घिर गए।

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साथ ही किशन कपूर के बाद धर्मशाला से नए गद्दी नेता की नींव भी रख दी गई। विशाल नैहरिया से शांता और धूमल गुट भी सियासी रूप से साध लिए गए। सूत्रों की मानें तो अंदरूनी राजनीति में जयराम और पवन राणा ने शांता और कपूर दोनों को कूटनीतिक रूप से साधा लिया। इस कूटनीति में मुख्यमंत्री ने सुधीर का फार्मूला भी अपनाया। सुधीर की तरह ही जयराम ने भी अंतिम समय में झटका देकर उम्मीदवार तय कर विरोधियों को संभलने का मौका नहीं दिया। 

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धर्मशाला में युवा वोट निभा सकता है निर्णायक भूमिका

धर्मशाला में पहली बार दोनों युवा चेहरे और एक ही समुदाय से होंगे। युवा वोट बैंक उपचुनाव में बड़ी भूमिका निभा सकता है। सुधीर के मैदान से बाहर होने से मुकाबला हाईप्रोफाइल नहीं रह गया है। दोनों युवा बड़ा चेहरा भी नहीं हैं, इसलिए जीत का दारोमदार संगठनों पर होगा।

सुधीर और कपूर दोनों का रुख चुनाव में क्या रहेगा, यह भी समीकरणों को बदलने का माद्दा रखेगा। कल्याड़ा (बंडी) निवासी विशाल नैहरिया और काला पुल निवासी विजय इंद्र कर्ण वर्तमान में दोनों शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले हैं। इसलिए, इस चुनाव में धरती पुत्र का नारा भी निरुत्तर हो गया है।  

भाजपा और कांग्रेस के लिए गद्दी कार्ड भारी न पड़ जाए 
कांग्रेस और भाजपा दोनों ने एक-दूसरे की काट के लिए उम्मीदवारी में गद्दी और युवा कार्ड चला, लेकिन यह सियासी समीकरण दोनों के लिए भारी भी पड़ सकती हैं। धर्मशाला विस क्षेत्र में गद्दी वोट बैंक की करीब 15 फीसदी है। ओबीसी वोट बैंक करीब 25 फीसदी है। शेष वोट बैंक ब्राह्मण, राजपूत और अन्य जातियों से है। दोनों दलों ने उम्मीदवारी तय करने में सिर्फ गद्दी वोट बैंक को फोकस किया है।

ऐसे में अब मतदान के दिन अन्य जातियों का क्या रुख रहेगा, यह देखना दिलचस्प होगा। भगवा दल 1977 से लगातार मेजर बृजलाल और किशन कपूर को ही गद्दी समुदाय से उम्मीदवार उतार रहा है। कांग्रेस ने भी दूसरी बार गद्दी समुदाय को मौका दिया है। इसलिए दूसरे समुदाय से आजार उम्मीदवार आया तो वह दोनों का खेल बिगाड़ सकता है।

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