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Shimla News: हिम सरस मेले में दस दिन 1.93 करोड़ का कारोबार
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महिलाओं के समूहों ने बेचे डेढ़ करोड़ के उत्पाद
मंडयाली और कांगड़ी धाम के सैलानियों ने लिए खूब चटखारे
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। रिज मैदान पर आयोजित हिम ईरा सरस मेले और फूड कार्निवल में स्वयं सहायता समूहों ने शानदार कारोबार किया है।
दस चले मेले में 1.93 करोड़ रुपये के उत्पाद बेचे गए जिसमें महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों ने डेढ़ करोड़ रुपये का कारोबार किया है। मेले में प्रदेश के 66 स्वयं सहायता समूह और देशभर के 14 राज्यों के 14 समूहों ने भाग लिया। इनके 70 से अधिक स्टॉलों पर शिल्पकला, हस्त निर्मित उत्पाद और पारंपरिक व्यंजन बेचे गए। 21 फूड स्टॉलों पर हिमाचल के पारंपरिक व्यंजनों में मंडयाली धाम, कांगड़ी धाम और कोदे के सिड्डू की महक भी खूब बिखरी। मंडी और कांगड़ी धाम के सैलानियों ने भी खूट चटखारे लिए। इसके अलावा लाहौल-स्पीति के छरमे का सिरप और हमीरपुर के स्वयं सहायता समूह के स्टॉल पर पपीते की बर्फी की भी काफी मांग मेले के दौरान रही। मेले का आयोजन राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एचपीएसआरएलएम) और केपीजीएमचीएमयू ने मिल कर किया। मेले में हस्तनिर्मित उत्पादों में हिमाचली टोपी, जैकेट, ऊनी सूट और जनजातीय वस्त्र शामिल थे जिन्हें पर्यटकों ने खूब सराहा। कुल्लू के गजान स्वयं सहायता समूह द्वारा बुने ऊनी उत्पाद, बुशहर विकलांग विशेष समूह द्वारा तैयार किए हैंडलूम उत्पाद और त्रिपुरा के जमुना समूह के जनजातीय वस्त्र भी आकर्षण का केंद्र रहे। इस दौरान लाइव सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और इंटर एक्टिव कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं जो मेले का आकर्षण बढ़ाने में सफल रहीं। हिम ईरा सरस मेला और फूड कार्निवल ने न केवल पर्यटन को बढ़ावा दिया बल्कि स्थानीय उत्पादकों तथा कारीगरों को उनकी पहचान बनाने का एक बेहतरीन मंच भी प्रदान किया।
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मंडयाली और कांगड़ी धाम के सैलानियों ने लिए खूब चटखारे
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। रिज मैदान पर आयोजित हिम ईरा सरस मेले और फूड कार्निवल में स्वयं सहायता समूहों ने शानदार कारोबार किया है।
दस चले मेले में 1.93 करोड़ रुपये के उत्पाद बेचे गए जिसमें महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों ने डेढ़ करोड़ रुपये का कारोबार किया है। मेले में प्रदेश के 66 स्वयं सहायता समूह और देशभर के 14 राज्यों के 14 समूहों ने भाग लिया। इनके 70 से अधिक स्टॉलों पर शिल्पकला, हस्त निर्मित उत्पाद और पारंपरिक व्यंजन बेचे गए। 21 फूड स्टॉलों पर हिमाचल के पारंपरिक व्यंजनों में मंडयाली धाम, कांगड़ी धाम और कोदे के सिड्डू की महक भी खूब बिखरी। मंडी और कांगड़ी धाम के सैलानियों ने भी खूट चटखारे लिए। इसके अलावा लाहौल-स्पीति के छरमे का सिरप और हमीरपुर के स्वयं सहायता समूह के स्टॉल पर पपीते की बर्फी की भी काफी मांग मेले के दौरान रही। मेले का आयोजन राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एचपीएसआरएलएम) और केपीजीएमचीएमयू ने मिल कर किया। मेले में हस्तनिर्मित उत्पादों में हिमाचली टोपी, जैकेट, ऊनी सूट और जनजातीय वस्त्र शामिल थे जिन्हें पर्यटकों ने खूब सराहा। कुल्लू के गजान स्वयं सहायता समूह द्वारा बुने ऊनी उत्पाद, बुशहर विकलांग विशेष समूह द्वारा तैयार किए हैंडलूम उत्पाद और त्रिपुरा के जमुना समूह के जनजातीय वस्त्र भी आकर्षण का केंद्र रहे। इस दौरान लाइव सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और इंटर एक्टिव कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं जो मेले का आकर्षण बढ़ाने में सफल रहीं। हिम ईरा सरस मेला और फूड कार्निवल ने न केवल पर्यटन को बढ़ावा दिया बल्कि स्थानीय उत्पादकों तथा कारीगरों को उनकी पहचान बनाने का एक बेहतरीन मंच भी प्रदान किया।