हिमाचल में बस रूट परमिट बेचने का खेल खत्म
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल में अब बस रूट परमिट बेचने का खेल खत्म हो गया है। बस मालिक 10-15 हजार रुपये में परिवहन विभाग से रूट लेकर आगे किसी और को 20-25 लाख रुपये में बेच देते थे। स्टेट ट्रांसपोर्ट अथारिटी (एसटीए) ने इस चलन पर अंकुश लगा दिया है।
एसटीए के नए फैसले के तहत अब जो भी बस रूट परमिट खरीदेगा, उसी को उस रूट पर बस चलानी होगी। वह किसी और को रूट परमिट नहीं बेच सकेगा। अगर बस मालिक उस रूट को नहीं चलाना चाहता है तो वह अपने ब्लड रिलेशन में रूट परमिट को दे सकता है, या विभाग के पास परमिट सरेंडर कर सकता है।
हाल ही में एसटीए की बैठक में 25 ऐसे मामले आए, जिनमें बस मालिकों ने रूट परमिट दूसरे व्यक्ति को बेचने का प्रस्ताव रखा, लेकिन विभाग ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया।
हिमाचल में परिवहन विभाग ने 34 सौ के करीब बस मालिक को रूट परमिट आवंटित किए हैं। इनमें कई लोग ऐसे हैं, जिन्होंने रूट परमिट आगे बेच दिए। वर्षों पहले जो रूट किसी व्यक्ति को दिया गया था, आज वही रूट परमिट आगे से आगे बेच दिया गया।
बताया जा रहा है कि निजी आपरेटर 5 से 6 साल तक रूटों पर बस दौड़ाते हैं और जब बस को रिपेयर की जरूरत होती है तो मालिक बस के साथ-साथ रूट परमिट भी बेच देते हैं, जिससे वे लाखों की कमाई करते हैं।
अधिकारियों का मानना है कि इससे निजी बस ऑपरेटरों को तो खूब फायदा हो रहा है, लेकिन परिवहन विभाग को इससे कोई आमदनी नहीं हो रही है।
आवंटित रूट आगे किसी और को बेचने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। एसटीए की बैठक में ऐसे कई मामले आए थे, जिन्हें स्वीकृति नहीं दी गई।
कैप्टन जेएम पठानिया, निदेशक, परिवहन विभाग