बल्क ड्रग पार्क: पहले चरण में 800 एकड़ में लगेंगी औद्योगिक इकाइयां, 50 कंपनियां तैयार करेंगी कच्चा माल
ऊना के हरोली में बनने वाले बल्क ड्रग पार्क में पहले चरण में 800 एकड़ भूमि पर उत्पादन गतिविधियां शुरू की जाएंगी।
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हिमाचल प्रदेश के ऊना के हरोली में बनने वाले बल्क ड्रग पार्क में पहले चरण में 800 एकड़ भूमि पर उत्पादन गतिविधियां शुरू की जाएंगी। उद्योग विभाग ने परियोजना को गति देने के लिए देश-विदेश की प्रमुख फार्मा कंपनियों के साथ संपर्क बढ़ा दिया है और निवेश आकर्षित करने के लिए जल्द ही विशेष इन्वेस्टर मीट करने की तैयारी कर ली है। विभाग का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक पार्क में उत्पादन शुरू करवाना है। प्रदेश के ऊना जिले के हरोली में बनने वाला बल्क ड्रग पार्क 1405 एकड़ भूमि पर स्थापित किया जाना है। पहले चरण में उन कंपनियों को प्राथमिकता दी जाएगी जो दवा निर्माण से जुड़ी कच्ची सामग्री और सक्रिय औषधीय संघटक (एपीआई), ग्रीन एनर्जी के उत्पादन में निवेश करने की इच्छुक हैं।
निवेशकों को आकर्षित करने के लिए अलग से इन्वेस्टर मीट करवाई जाएगी। इसमें देश की अग्रणी फार्मास्यूटिकल कंपनियों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा। परियोजना में निवेश की अपार संभावनाओं को देखते हुए कई बड़ी कंपनियों ने प्रारंभिक रुचि दिखाई है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी लगातार निवेशकों के साथ बैठकें कर रहे हैं और उन्हें पार्क में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दे रहे हैं। जापान और चीन सहित विभिन्न देशों की फार्मा कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में करोड़ों रुपये का निवेश कर चुकी कई प्रतिष्ठित कंपनियां भी हिमाचल में अपनी इकाइयां स्थापित करने के लिए तैयार बताई जा रही हैं। सरकार का मानना है कि बल्क ड्रग पार्क शुरू होने से प्रदेश में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि चार - पांच महीने के भीतर पहले चरण का उत्पादन शुरू करने का प्लान है।
50 कंपनियां करेंगी कच्चा माल तैयार
पहले चरण में 50 कंपनियां फार्मा कंपनियों के लिए कच्चा माल बनाएंगी। इसमें देश-विदेश के नामी औद्योगिक घराने निवेश करने को तैयार हैं। पार्क के भीतर 10 हजार करोड़, जबकि बाहर 5,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा। इसमें 35 हजार लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है। पार्क के लिए साइट डेवलपमेंट प्लान, रोड, बाउंड्री वाॅल और पुल निर्माण के लिए टेंडर किए जा चुके हैं।