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Himachal News: जौ की नई किस्म BSH-497 हिमालयी किसानों के लिए वरदान, जनजातीय क्षेत्रों में बढ़ेगा उत्पादन
Sun, 14 Jun 2026 12:35 PM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Sun, 14 Jun 2026 12:35 PM IST
सार
आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के क्षेत्रीय केंद्र शिमला ने नग्न जौ की नई उन्नत किस्म BSH-497 विकसित की है। यह किस्म हिमालयी और जनजातीय क्षेत्रों के किसानों के लिए लाभकारी मानी जा रही है। नई किस्म वर्षा आधारित खेती में 21.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन देने में सक्षम है और रोग प्रतिरोधक भी है। पढ़ें पूरी खबर...
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जौ।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के क्षेत्रीय केंद्र शिमला ने नग्न जौ की नई उन्नत किस्म बीएसएच-497 विकसित की है। यह किस्म हिमालयी राज्यों के किसानों, विशेषकर जनजातीय क्षेत्रों के लिए लाभकारी होगी। आईएआरआई के निदेशक सीएच श्रीनिवास राव ने शिमला दौरे के दौरान यह जानकारी दी। यह किस्म उन क्षेत्रों में 21.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर फसल देगी, जहां बारिश आधारित खेती होती है। वहीं बीएसएच 352 ऐसे क्षेत्रों में 21.7 क्विंटल फसल देती है। नई किस्म रोग प्रतिरोधक है।
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उन्होंने बताया कि एक से दो माह में केंद्र सरकार से इसे अनुमोदन मिलेगा। इसके बाद बीज हिमाचल प्रदेश कृषि विभाग को उपलब्ध कराया जाएगा। पांगी, भरमौर, लाहौल-स्पीति और किन्नौर में टीएसपी योजना के तहत इसका इस्तेमाल होगा। यह किस्म प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देगी और बीएचएस-352 का उन्नत विकल्प बनेगी। श्रीनिवास राव ने वैज्ञानिकों से खाद्यान्न और फल फसलों की नई एवं उन्नत किस्में विकसित करने को कहा। उन्होंने सेब सहित अन्य शीतोष्ण फल फसलों की कम शीत आवश्यकता वाली किस्मों पर जोर दिया। क्षेत्रीय केंद्र शिमला हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के लिए रोग प्रतिरोधी गेहूं और जौ की किस्में विकसित कर रहा है। केंद्र ने पूसा गोल्ड और अमरतारा-प्राइड जैसी सेब की उन्नत किस्में भी दी हैं। कीवी और अखरोट के पौधे भी उपलब्ध कराए गए हैं। पिछले कुछ वर्षों में लगभग 33 हजार फलदार पौधे वितरित किए गए हैं।
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किसानों को तकनीकी लाभ
सेब में वूली एपल एफिड नियंत्रण के लिए वूली एफिड ट्रैप विकसित किया गया है। रोगों की त्वरित पहचान संबंधी तकनीकों का लाभ भी प्रदेश के बागवानों और किसानों को मिल रहा है। श्रीनिवास राव ने सीपीआरआई के निदेशक बृजेश सिंह के साथ कृषि एवं बागवानी सचिव सी पालरासू से मुलाकात की। उन्होंने किसानों तक संस्थान की तकनीकों और अनुसंधान उपलब्धियों को पहुंचाने पर चर्चा की। केंद्र परिसर में 50 हजार लीटर क्षमता के सिंचाई जल भंडारण टैंक और सौर ऊर्जा उत्पादन प्रणाली की भी शुरुआत हुई।
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