हिमाचल की बहादुर बेटियों को अब नहीं मिलेगा वीरता पुरस्कार
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राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार पर विवाद के चलते असमंजस के बीच हिमाचल की दोनों बहादुर बेटियों को समारोह स्थल से रुआंसा लौटना पड़ा है। दोनों के नाम वीरता पुरस्कार विजेताओं की सूची में शामिल नहीं हैं।
बुधवार को गणतंत्र दिवस की फुल ड्रेस रिहर्सल में कुल्लू की छात्रा मुस्कान और सीमा समेत पुरस्कार के लिए संस्था की ओर से चयनित सभी 19 बच्चों को रिहर्सल से बाहर रखा गया, जबकि उन्हें बाकायदा कुल्लू की संस्था ने ड्रेस उपलब्ध कराई थी।
मुस्कान और सीमा समेत अन्य बच्चों को अब भारतीय बाल कल्याण परिषद (आईसीसीडब्ल्यू) अपने स्तर पर सम्मानित करेगी। विवाद के चलते परिषद की ओर से देशभर से चयनित 18 युवाओं को 26 जनवरी को राजपथ में होने वाली परेड से भी बाहर रखा गया है।
तय कार्यक्रम से ये बच्चे अभिभावकों के साथ दिल्ली रवाना हुए थे। बुधवार को छात्रा मुस्कान और सीमा जब अन्य प्रतिभागियों के साथ रिहर्सल को पहुंचीं तो उन्हें इसमें शामिल नहीं किया।
ऐसे में मंच से दोनों छात्राएं और अन्य बच्चों की आंखों से आंसू छलक गए। कुल्लू के ब्राधा गांव की मुस्कान और सीमा के परिजन 16 जनवरी से उनके साथ दिल्ली में हैं।
मनचलों को सिखाया था सबक
छात्रा मुस्कान के पिता चुनी लाल और सीमा के पिता दामोदार दास ने कहा कि उनकी बहादुर बेटियों सहित संस्था से चयनित 19 प्रतिभागियों की अनदेखी हुई है। उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
मुस्कान के पिता चुनी लाल ने कहा कि भारतीय बाल कल्याण परिषद की अध्यक्षा ने अब अपने स्तर पर कुल्लू की बेटियों को सम्मानित करने की बात कही है। उन्होंने दावा किया राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए करीब 22 युवाओं को चुना गया है।
7 वर्ष की मुस्कान और 14 साल की सीमा दस जुलाई 2017 को सहेलियों के साथ स्कूल जा रही थीं। इस दौरान उनको मनचलों ने परेशान किया। इसी बीच दोनों ने मनचलों को सबक सिखाते हुए पिटाई कर दी। उन्होंने मनचलों को पुलिस थाने तक पहुंचाया था।