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किरतपुर-मनाली फोरलेन पर 2.8 किमी लंबी औट-थलौट सुरंग के दोनों सिरे मिले

Sat, 03 Aug 2019 05:53 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नगवाईं (मंडी)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नगवाईं (मंडी) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sat, 03 Aug 2019 05:53 PM IST
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Both ends of 2.8 km long Aut thlot tunnel connected on Kiratpur Manali four lane
PIC - फोटो : अमर उजाला

सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण चंडीगढ़-किरतपुर-मनाली फोरलेन प्रोजेक्ट की सबसे लंबी 2.83 किमी औट से थलौट टनल की खुदाई शनिवार को पूरी हो गई है। दोनों छोर 16 माह के रिकॉर्ड समय में मिला दिए गए हैं। प्रोजेक्ट की यह पहली सुरंग है, जिसके दोनों छोर मिले हैं। करीब सात हजार करोड़ से 320 किमी लंबे फोरलेन का निर्माण दो चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में किरतपुर से नागचला का काम 2013 से जारी है।

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यहां चार सुरंगें बननी हैं, लेकिन अब तक किसी भी टनल के दोनों छोर नहीं मिले हैं। दूसरे चरण में नागचला से मनाली तक 12 सुरंगों का निर्माण होना है। इस प्रोजेक्ट में औट से पंडोह के बीच सबसे अधिक 19 किलोमीटर लंबाई की 10 सुरंगें बन रही हैं। इसमें सात किमी खुदाई कर ली है और औट से थलौट की खुदाई सोमवार को पूरी हो गई। यह जानकारी निर्माण कार्य में लगी कंपनी एफ्कान के एजीएम बलविंद्र गुरैया और अधिकारी वीरेंद्र लखनपाल ने दी।

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चंडीगढ़ से 60 किमी घटेगी मनाली की दूरी

Both ends of 2.8 km long Aut thlot tunnel connected on Kiratpur Manali four lane

इस फोरलेन से चंडीगढ़-मनाली के बीच की दूरी करीब 50 से 60 किमी कम होगी। इससे पर्यटकों का करीब दो घंटे तक का समय बचेगा। वर्तमान में 320 किमी की दूरी कम होकर करीब 260 किमी रह जाएगी। चंडीगढ़ से मनाली करीब सात घंटों में पहुंचा जा सकेगा, जिसके लिए अभी 9 से 10 घंटे लगते हैं।

इस तरह चल रहा काम- नेरचौक से मनाली तक बनने वाले फोरलेन के निर्माण कार्य पर लगभग 4800 करोड़ खर्च होंगे। 2013 से प्रोजेक्ट के पहले चरण का कार्य किरतपुर से नेरचौक तक चल रहा है। इस हिस्से को करीब 2260 करोड़ से बनाया जा रहा है।

यह काम अभी 70 फीसदी भी पूरा नहीं हुआ है, जबकि इसके पूरा होने की अवधि 2016 तक थी। नेरचौक से मनाली तक का काम दूसरे चरण में किया जा रहा है। रोहतांग टनल की तर्ज पर औट से थलौट टनल न्यू आस्ट्रियन टनलिंग मैथड से बनी है।

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