बगावत के सुर बढ़ा रहे भाजपा की बेचैनी, एक ही सीट के हैं कई दावेदार
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विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा में टिकटों को लेकर घमासान मचा हुआ है। पार्टी की 30 से अधिक सीटों पर चुनावी ताल ठोकने वालों की संख्या दर्जन पार है जबकि शेष सीटों पर तीन से अधिक दावेदार हैं।
दूसरी तरफ पार्टी हर सीट से केवल तीन दावेदारों का पैनल तैयार कर रही है। टिकट नहीं मिलने वाले दावेदार निर्दलीय उतर कर पार्टी की मुसीबत बढ़ा सकते हैं। आचार संहिता से पहले उठ रहे बगावत के सुर पार्टी नेतृत्व की बेचैनी बढ़ा रहे हैं।
पार्टी इस बात पर नजर बनाए हुए है कि टिकट कटने के बाद बागी सुरों को कैसे शांत किया जाएगा, जिसकी ग्राउंड रिपोर्ट तैयार हो रही है। भाजपा में टिकटों के दावेदार अपने स्तर पर लॉबिंग कर रहे हैं। एक सीट पर कई कई दावेदारों से प्रदेश नेतृत्व भी अपनी चिंता जता चुका है।
पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल भी बागी सुरों को शांत करने के लिए जल्द टिकट आवंटन की पैरवी कर चुके हैं। इस बीच पार्टी ने प्रदेश संगठन को सभी सीटों में पार्टी लाइन से बाहर जाने वाले दावेदारों पर नजर रखने को कहा है।
हर सीट पर संगठन ने मानीटरिंग के लिए पदाधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी है। केंद्रीय नेतृत्व ने चुनाव प्रभारी और प्रदेश प्रभारी को हालात पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। ये पदाधिकारी हर सीट की रिपोर्ट प्रदेश प्रभारी को सौंपेंगे।
टिकट के मानक हैं सख्त
भाजपा के आंतरिक सर्वेक्षण में विधायकों, पूर्व विधायकों और नए चेहरों के लिए अलग अलग मानक तय किए गए हैं। विधायकों के पांच वर्ष के कामकाज के साथ उनकी सदन में भूमिका, क्षेत्र में सक्रियता सहित लोकसभा चुनाव और उपचुनावों में भूमिका को अहम माना गया है। 75 वर्ष से अधिक उम्र सीमा के मानक में भी कुछ दावेदारों का पत्ता साफ होगा।
कांगड़ा और शिमला की 23 सीटें अहम
नए चेहरों को आगे लाने के लिए गैर भाजपा विधायकों वाली सीटों को टटोला जा रहा है। नई चयन प्रक्रिया में कांगड़ा और शिमला जिले की 23 सीटों पर अधिकांश नए चेहरे होंगे। आंतरिक सर्वेक्षण के अलावा प्रदेश प्रभारी, प्रदेश संगठन और आरएसएस के स्तर से हर विधानसभा में दावेदारों की ग्रेडिंग कर रिपोर्ट दी जानी है। इसके साथ सांसदों से उनके लोकसभा क्षेत्र में आने वाली 17 विधानसभा सीटों पर अपनी रिपोर्ट देंगे।
कम अंतर वाली सीटों पर मंथन
वर्ष 2012 में पार्टी की आधा दर्जन ऐसी सीटें थीं, जिसमें महज एक प्रतिशत से कम अंतर से भाजपा को जीत मिली। इन सीटों पर पार्टी अलग से रणनीति बना रही है। कुछ नेताओं का दूसरी जगह पलायन हो सकता है जबकि कुछ का टिकट कटेगा। पार्टी की कसौली, शिमला, भटियात, कुटलैहर विधानसभा सीटों में जीत का अंतर बेहद कम था। कसौली में तो महज 24 वोटों से भाजपा जीती थी।