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इस परीक्षा में तो फेल हो गए भाजपा नेता

Sun, 23 Mar 2014 12:31 PM IST
Updated Sun, 23 Mar 2014 12:31 PM IST
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BJP leaders failed to use RTI

प्रदेश में भाजपा नेता आरटीआई का इस्तेमाल वैसे नहीं सीख सके, जैसे कि कांग्रेस नेता करते आए हैं। कुछ कांग्रेस नेताओं ने विपक्ष की भूमिका में सूचना अधिकार का जमकर इस्तेमाल किया।

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केंद्रीय मंत्री रहते वीरभद्र सिंह ने स्वयं अपने नाम से आरटीआई में सूचना ली। धर्माणी, सिंघीराम जैसे नेता भी इस अधिकार का इस्तेमाल करते रहे हैं। कुछ साल पहले मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अपने खिलाफ चल रहे एक मामले को लेकर आरटीआई में जानकारी मांगी थी।
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सूचना नहीं मिली तो उन्होंने जांच एजेंसी के खिलाफ सूचना आयोग में अपील की। आयोग के निर्णय पर उन्हें वांछित सूचना दी गई।

सूचना नहीं मिली तो आयोग में की शिकायत

BJP leaders failed to use RTI

कांग्रेस सरकार में पूर्व में मंत्री रहे सिंघीराम ने तो सभी आला अधिकारियों की अर्जित संपत्ति की सूचना ही मांग ली थी।

हाल ही में शिमला जिला महिला कांग्रेस की एक नेत्री ने अपनी ही सरकार से सूचना नहीं मिलने पर अब आयोग में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अपील की है।

घुमारवीं के कांग्रेस विधायक राजेश धर्माणी भी एक मामले में सूचना नहीं मिलने पर आयोग गए। इनके अलावा बाकी नेताओं ने भी इस हथियार का खूब इस्तेमाल किया था।

इनके लिए जरूरी नहीं है आरटीआई

BJP leaders failed to use RTI

भाजपा के कुछ नेताओं का कहना है कि सभी अपने नाम से जानकारी मागें, ऐसा जरूरी नहीं है। भाजपा के प्रदेश महामंत्री राजीव बिंदल का कहना है कि आरटीआई का इस्तेमाल जरूरत के हिसाब से हो सकता है। जिसको जरूरत हो, वह जानकारी लेता है।

उन्होंने कहा कि हमें अपने नाम से जानकारी लेने की ऐसी कोई जरूरत नहीं पड़ी। इसीलिए इसका ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया।

वहीं, सूचना आयोग के सचिव डॉ. देवेंद्र गुप्‍ता का कहना है कि आरटीआई में कोई भी व्यक्ति सूचना जरूरत पर ही मांगता है। यह अधिकार भारत के सभी नागरिकों का है। फिर चाहे कोई किसी भी प्रोफेशन से जुड़ा हो। उन्होंने कहा कि कोई क्यों सूचना नहीं मांग रहा? इस पर कुछ कहने को नहीं बनता है।

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