शांता के निशाने पर फिर पीएम मोदी, मार्गदर्शक मंडल पर उठाए सवाल
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भाजपा में मोदी राज आने के बाद बड़े-बुजुर्ग नेताओं को दरकिनार कर उनके लिए बनाए गए मागदर्शक मंडल की विश्वसनीयता पर पार्टी के वरिष्ठ सांसद और मार्गदर्शक मंडल के सदस्य शांता कुमार ने ही सवाल उठा दिए हैं।
अमर उजाला से विशेष बातचीत में शांता कुमार ने कहा कि लोग कहते हैं कि पार्टी में कोई मार्गदर्शक मंडल बनाया गया है। लेकिन, इसके बारे में मुझे कुछ पता नहीं है। मार्गदर्शक मंडल की आज तक कोई बैठक नहीं हुई है।
उत्तराखंड में हरीश रावत सरकार की बर्खास्तगी में अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग के सवाल पर शांता कुमार ने टिप्पणी से परहेज किया, लेकिन इतना जरूर कहा कि यह स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सही नहीं है।
जवानी को वर्षों के पैमाने पर नहीं मापा जा सकता
वर्ष 1977 और 1992 में तत्कालीन केंद्र की कांग्रेस सरकारों ने हिमाचल में उनके सीएम रहते आधे कार्यकाल के दौरान ही उनकी सरकारें गिरा दी थीं, इसका दर्द भी उनके चेहरे पर झलका। पार्टी में बुजुर्ग नेताओं पर अंकुश लगाने के लिए 75 वर्ष आयु सीमा के निर्णय पर शांता कुमार ने कहा कि जवानी को वर्षों के पैमाने पर नहीं मापा जा सकता है।
व्यक्तित्व और अनुभव की अपनी महत्ता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण रखने के लिए राष्ट्रीय जनसंख्या नीति बनाएं। चुनाव पांच वर्ष में सिर्फ एक बार हों, इस पर भी मोदी सर्वसम्मति से कोई नीति बनाएं।
सीयू के लिए धर्मशाला की जमीन की करूंगा पैरवी : शांता
सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए धर्मशाला के जदरांगल में प्रदेश सरकार की ओर से चिह्नित की गई जमीन का मैं समर्थन करता हूं। पालमपुर स्थित अपने निवास स्थान पर अमर उजाला से शांता कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार ने केंद्रीय विवि के लिए धर्मशाला के पास जरूरत से ज्यादा जमीन उपलब्ध करवाई है।
अब मैं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से मिलकर धर्मशाला के पास चिह्नित जमीन की पैरवी कर जल्द भवन निर्माण की मांग उठाऊंगा। 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने और दावेदारों के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह फैसला हाईकमान ही लेगा।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के कई आरोप लगने के बाद सीएम वीरभद्र सिंह पर हाईकमान को कार्रवाई करनी चाहिए। दो बार अधूरा कार्यकाल मिलने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि अगर मुझे बतौर मुख्यमंत्री पूरे पांच साल का कार्यकाल मिलता तो हिमाचल को स्विट्जरलैंड बना देता।