इस घाटी में सिकुड़ने लगे 30 फीसदी ग्लेशियर, बन गईं झीलें
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लाहौल घाटी में जैव विविधता को लेकर स्थिति चिंजाजनक होती जा रही है। घाटी में 30 फीसदी ग्लेशियर सिकुड़ने लगे हैं। जबकि झीलें बन गई हैं। इसका खुलासा केलांग में आयोजित एक वर्कशॉप के दौरान राज्य जैव विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव कुनाल सत्यार्थी ने किया है।
वर्कशॉप में कुनाल सत्यार्थी ने कहा कि ट्रैकिंग के बहाने हिमालय की दुर्लभ जड़ी बूटियों की तस्करी की जा रही है। जिस पर रोकथाम लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है। 30 फीसदी ग्लेशियरों का सिकुड़ना खतरे का सूचक है। जैव विविधता व परंपराओं को बचाने के लिए हम सबको ग्राम स्तर पर प्रयास करने होंगे।
घाटी में लुप्त होने लगी जैव विविधता की 13 प्रजातियां
उन्होंने कहा कि लाहौल घाटी में भारी मात्रा में जैव विविधता पाई जाती है। इसकी 13 प्रजातियां लुप्त होने के कगार पर हैं। इनके संरक्षण के लिए सभी को आगे आना होगा। हिमाचल के लाहौल-स्पीति, कुल्लू, किन्नौर, चंबा तथा शिमला जिलों में करोड़ों रुपये की जैव विविधता पाई जाती है।
इनका संरक्षण करना बेहद जरूरी है। इसके लिए 12 जिलों के 78 विकास खंडों की 3226 ग्राम पंचायतों में जैव विविधता प्रबंधन कमेटियों का गठन किया जा रहा है। अभी तक प्रदेश में 417 ग्राम पंचायतों में यह कमेटियां गठित हुई हैं।