फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Big relief to gramin vidya upasak in himachal

1400 ग्रामीण विद्या उपासकों को राहत, ट्रिब्यूनल गए थे शिक्षक

Wed, 21 Feb 2018 01:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Wed, 21 Feb 2018 01:13 PM IST
विज्ञापन
Big relief to gramin vidya upasak in himachal

ग्रामीण विद्या उपासक वर्ग से नियमित हुए शिक्षकों को प्रदेश सरकार ने डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन (डीएलएड) करने से छूट दे दी है। उप सचिव प्रारंभिक शिक्षा ने प्रारंभिक शिक्षा निदेशक को भेजे पत्र में कहा है कि सरकार ने ग्रामीण विद्या उपासकों की डीएलएड से छूट देने की मांग पर गहनता से विचार किया है।

विज्ञापन


इस दौरान सामने आया कि ग्रामीण विद्या उपासकों ने जेबीटी स्पेशल सर्टिफिकेट प्राप्त किया है। यह सर्टिफिकेट जेबीटी डिप्लोमा के बराबर है। ऐसे में सरकार ने इन्हें डीएलएड करने से छूट दे दी है। राज्य के सरकारी स्कूलों में तैनात ग्रामीण विद्या उपासकों को अप्रशिक्षित बताकर शिक्षा विभाग ने डीएलएड और ब्रिज कोर्स करने की शर्त लगाई थी।
विज्ञापन


नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ  ओपन स्कूल के तहत इन शिक्षकों को कोर्स करना अनिवार्य किया गया था। सरकारी स्कूलों में नियुक्त 1400 ग्रामीण विद्या उपासकों ने इसका विरोध किया था। शिक्षकों का कहना था कि साल 2011 में इन्हें विभाग ने नियमित किया था। नियमित करने से पहले जेबीटी का प्रशिक्षण दिलाया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


अब छह साल बाद डीएलएड करने की शर्त थोपना गलत है। ग्रामीण विद्या उपासक शिक्षक संघ ने इस मामले को ट्रिब्यूनल में चुनौती भी दी है। ट्रिब्यूनल ने प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय से इस बाबत जवाब तलब किया हुआ है। इसी बीच सरकार ने ग्रामीण विद्या उपासकों को राहत देते हुए डीएलएड करने से छूट दे दी है।

सीएंडवी शिक्षकों से भेदभाव बर्दाश्त नहीं

Big relief to gramin vidya upasak in himachal

सीएंडवी अध्यापक संघ ने भी सरकार से डीएलएड में छूट देने की मांग की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष चमनलाल शर्मा ने कहा है कि साल 2002 में नियुक्त ग्रामीण विद्या उपासकों को डीएलएड में छूट मिल सकती है तो सीएंडवी शिक्षकों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि साल 2004 में पैरा शिक्षक शास्त्री लगे और 2014 में नियमित हुए। उसी प्रकार पीटीए 2006 में लगे 2014 में नियमित हुए। इन्हें डीएलएड में छूट क्यों नहीं दी जा रही। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विद्या उपासक, पैरा, पीटीए की भर्ती प्रक्रिया एक समान है। 

भाषा अध्यापक जो 2011 में लगे उन्होंने प्रभाकर, एलटी की ट्रेनिंग की है। इन्हें छूट क्यों नहीं दी जा रही। अध्यक्ष चमनलाल शर्मा ने कहा कि शिक्षा विभाग का सौतेला व्यवहार संघ कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। अन्य वर्गों को राहत नहीं दी गई तो शिक्षा निदेशालय का घेराव किया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed