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अंग्रेजों के शासनकाल में बने इस विशाल टैंक में पड़ीं दरारें; हड़कंप, एक्सपर्ट बुलाए

Tue, 30 Jan 2018 10:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Tue, 30 Jan 2018 10:06 AM IST
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big Cracks in ridge tank made during British rule

अंग्रेजों के शासनकाल में बने शहर के इस विशाल टैंक में दरारें पड़ गईं है। इससे एमसी में हड़कंप मच गया है।  कई दशकों से आधे से ज्यादा रिज मैदान का भार उठा रहे पेयजल टैंक में दरारें पड़ गईं हैं। 

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सोमवार को इस टैंक की सफाई के दौरान इन दरारों के बढ़ने का पता चला है। ये दरारें टैंक की छत पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के नजदीक पाई गई हैं। हालांकि, पिछले साल भी टैंक की सफाई के दौरान एक चैंबर में दरार देखी गई थी। लेकिन इस बार दो चैंबरों में दरारें मिलीं हैं। 
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यही नहीं, दरारें बढ़ भी गई हैं। दरारें छत वाले हिस्से में होने की वजह से फिलहाल लीकेज की संभावना नहीं है। बहरहाल दरारों को बढ़ने से रोकने के लिए निगम प्रशासन आईआईटी रुड़की से विशेषज्ञों की टीम बुलाने जा रहा है। यह टीम ही दरारों की मरम्मत के तरीके बताएगी।

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45 लाख लीटर है टैंक की क्षमता

big Cracks in ridge tank made during British rule

अंग्रेजों के शासनकाल में बना यह टैंक शहर का सबसे पुराना टैंक है। इसके चारों ओर मोटी दीवार है, ऐसे में इसके टूटने या फटने की संभावना न के बराबर है। नगर निगम ने आईपीएच विभाग के इंजीनियर इन चीफ को भी सुझाव देने की अपील की थी। 

लेकिन ये टैंक काफी पुराना है और ऐसे में एक्सपर्ट की राय लेना ही बेहतर है। इसीलिए अब आईआईटी से विशेषज्ञ बुलाए जा रहे हैं। करीब सौ साल पुराने इस टैंक की जल भंडारण क्षमता करीब 45 लाख लीटर है।

संजौली टैंक से बिछी पाइपलाइन से इस टैंक के लिए पानी की सप्लाई होती है। शहर के मालरोड, लोअर बाजार, रामबाजार, बस स्टैंड, कृष्णानगर, कैथू, लक्कड़ बाजार, अनाडेल जैसे कोर एरिया में इसी टैंक से पानी की सप्लाई होती है।

टैंक के छत वाले हिस्से में दरारें देखी गई हैं। लेकिन इससे किसी तरह की लीकेज की संभावना नहीं है। फिलहाल मरम्मत का कार्य शुरू करने से पहले विशेषज्ञों की टीम बुलाई जा रही है। जल्द ही बजट का भी प्रावधान करेंगे।-धर्मेंद्र गिल, अधीक्षण अभियंता, ग्रेटर शिमला वाटर सर्कल

रैलियों से रिज को खतरा, हो सकता है बड़ा हादसा

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 टैंक में दरारें आने से हादसे का खतरा भी बढ़ गया है। छत वाला हिस्सा कमजोर होने से इसके टूटने का भी डर पैदा हो गया है। टैंक को यह खतरा रिज मैदान पर होने वाली बड़ी रैलियों से है।

आमतौर पर टैंक वाले हिस्से पर गाड़ियां तक चलने की अनुमति नहीं है। लेकिन प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की अक्सर यहां जनसभाएं और रैलियां होती है। इस दौरान रिज टैंक की पूरी छत पर किसी तरह की रोक नहीं होती।

महात्मा गांधी की प्रतिमा से लेकर एचपीएमसी तक हजारों लोग रिज के इस हिस्से में बैठते है। ऐसे में छत की दरार बढ़ने का खतरा है। हालांकि उपर से ये दरारें नहीं दिखती, लेकिन टैंक में ये दरारें अंदर से छत वाले हिस्से में देखी जा सकती है।

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