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जो बैंक का कर्ज नहीं चुकाता उसे न लड़ने दिया जाए चुनाव
Fri, 23 Aug 2019 06:05 PM IST
अरविन्द ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Fri, 23 Aug 2019 06:05 PM IST
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देश में साल 2024 तक पांच ट्रिलियन अर्थव्यवस्था प्राप्त करने के लिए शुक्रवार को शिमला में प्रदेश के 18 पीएसयू बैंकों के अधिकारियों की राज्य स्तरीय बैठक हुई। बहुस्तरीय परामर्श और नए विचारों के सृजन के लिए बैठक में बैंक अधिकारियों ने कई मुद्दों पर राय रखी। बैंकों ने ऋण नहीं चुकाने वाले लोगों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की।
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यूको बैंक के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ एके गोयल की अध्यक्षता में हुई बैठक में अधिकारियों ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को किसी भी स्तर का चुनाव लड़ने से पहले एनपीए को लेकर बैंकों से एनओसी लेना अनिवार्य किया जाना चाहिए। सरकार की इस पहल से बैंकों के एनपीए में बड़ी कमी आएगी। बैंक अधिकारियों ने डीबीटी के लिए विभिन्न बैंकों में खुले खातों को भी बंद करने की वकालत की।
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कहा गया कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) का लाभ उठाने के लिए लोगों ने कई बैंकों में खाते खुलवाए थे। बैंक खातों को आधार नंबर से जोड़ने के अभियान के बाद जिस खाते में नवीनतम आधार नंबर जोड़ा गया है, उसमें ही डीबीटी का पैसा जा रहा है। ऐसे में अन्य खाते बंद होने चाहिए। बैंक अधिकारियों ने एजूकेशन लोन नहीं चुकाने वालों की डिग्री में डिफॉल्टर लिखने की मांग भी उठाई।
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यूको बैंक के उप महाप्रबंधक जेएन कश्यप ने बताया कि बैठक में चिंतन किया गया कि बैंक देश की समृद्धि में सक्रिय भागीदार के रूप में कार्य करने एवं नीति निर्धारण के लिए सरकारी योजनाओं को पूरा करने में कितने सक्षम तथा समर्थ हैं। बैठक में साइबर क्राइम, डिजिटल सिक्योरिटी, उत्तम प्रौद्योगिकी, सिंगल विंडो, ऋण आवेदन के लिए सरल प्रक्रिया सहित कई मामलों पर विस्तृत चर्चा हुई।
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बैंक अधिकारियों ने प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं को दिए जाने वाले ऋणों की वसूली करने में सरकारी मदद की मांग की। कहा गया कि अगर सरकारी योजना में ऋण का समय पर भुगतान नहीं होता है तो सरकार की ओर से दी जा रही सब्सिडी बैंकों को दी जानी चाहिए।