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Shimla News: बीसीएस के तीन छात्रों के अपहरण मामले में जमानत याचिका खारिज
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आरोपी छात्रों को अपहरण करके ले गया था कोटखाई
बिशप कॉटन स्कूल में पढ़ते हैं तीनों पीड़ित छात्र
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के प्रतिष्ठित बिशप कॉटन स्कूल (बीसीएस) के तीन नाबालिग छात्रों के अपहरण और फिरौती मांगने के मामले में अदालत ने आरोपी सुमित सूद की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव महाजन की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को राहत देने से इन्कार कर दिया। कोटखाई निवासी आरोपी की ओर से अदालत में दलील दी गई कि पुलिस मामले की जांच पूरी कर आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। आरोपी ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उसके पिता बीमार हैं और उनकी देखभाल के लिए परिवार में कोई अन्य पुरुष सदस्य नहीं है। वहीं जमानत याचिका का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने बताया कि जांच में सामने आया था कि आरोपी ने बच्चों को लिफ्ट देने के बहाने कार में बैठाया था। इसके बाद रिवॉल्वर दिखाकर उनकी आंखों पर डक्ट टेप चिपका दी और हाथ बांध दिए। आरोप है कि आरोपी बच्चों को जान से मारने, नशीले पदार्थ देने और उनकी उंगलियां काटने की धमकी देकर कोटखाई ले गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी ने पैसों की तंगी के चलते इस साजिश को अंजाम दिया था।
गवाहों को प्रभावित करने का खतरा
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि केवल आरोपपत्र दाखिल होना जमानत देने का आधार नहीं बन जाता। आरोपी पर लगाए गए आरोप बेहद गंभीर और जघन्य हैं, जो समाज की अंतरात्मा को झकझकोरते हैं। अदालत ने कहा कि मामला अभी शुरुआती चरण में है और गवाहों के बयान दर्ज होना बाकी हैं। ऐसे में आरोपी के रिहा होने पर गवाहों को धमकाने या सबूतों से छेड़छाड़ किए जाने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।
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बिशप कॉटन स्कूल में पढ़ते हैं तीनों पीड़ित छात्र
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के प्रतिष्ठित बिशप कॉटन स्कूल (बीसीएस) के तीन नाबालिग छात्रों के अपहरण और फिरौती मांगने के मामले में अदालत ने आरोपी सुमित सूद की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव महाजन की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को राहत देने से इन्कार कर दिया। कोटखाई निवासी आरोपी की ओर से अदालत में दलील दी गई कि पुलिस मामले की जांच पूरी कर आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। आरोपी ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उसके पिता बीमार हैं और उनकी देखभाल के लिए परिवार में कोई अन्य पुरुष सदस्य नहीं है। वहीं जमानत याचिका का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने बताया कि जांच में सामने आया था कि आरोपी ने बच्चों को लिफ्ट देने के बहाने कार में बैठाया था। इसके बाद रिवॉल्वर दिखाकर उनकी आंखों पर डक्ट टेप चिपका दी और हाथ बांध दिए। आरोप है कि आरोपी बच्चों को जान से मारने, नशीले पदार्थ देने और उनकी उंगलियां काटने की धमकी देकर कोटखाई ले गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी ने पैसों की तंगी के चलते इस साजिश को अंजाम दिया था।
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गवाहों को प्रभावित करने का खतरा
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि केवल आरोपपत्र दाखिल होना जमानत देने का आधार नहीं बन जाता। आरोपी पर लगाए गए आरोप बेहद गंभीर और जघन्य हैं, जो समाज की अंतरात्मा को झकझकोरते हैं। अदालत ने कहा कि मामला अभी शुरुआती चरण में है और गवाहों के बयान दर्ज होना बाकी हैं। ऐसे में आरोपी के रिहा होने पर गवाहों को धमकाने या सबूतों से छेड़छाड़ किए जाने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।
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