बाबा भलकू स्मृति साहित्यिक यात्रा: कालका-शिमला ट्रैक पर चलती ट्रेन में कवियों ने पढ़ीं कविताएं
साहित्यिक रेल यात्रा को शिमला रेलवे स्टेशन से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यात्रा में देश और प्रदेश के विभिन्न भागों से स्थानीय लेखकों सहित 35 लेखक शामिल रहे।
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... वो आज भी दौड़ रहा है, शिमला-कालका, कालका-शिमला खिलौना रेल के साथ सिटी बजाता, हाथ में पकड़े लालटेन, एसआर हरनोट ने इन पंक्तियों के साथ बाबा भलखू को याद किया। मौका था हिमालय साहित्य मंच की ओर से कालका-शिमला धरोहर रेल में पांचवीं भलकू स्मृति साहित्यिक यात्रा का। यात्रा में 35 लेखकों ने लिया भाग। साहित्यिक रेल यात्रा को शिमला रेलवे स्टेशन से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यात्रा में देश और प्रदेश के विभिन्न भागों से स्थानीय लेखकों सहित 35 लेखक शामिल रहे। यात्रा शिमला स्टेशन से बड़ोग रेलवे स्टेशन तक और वहां से वापस शिमला रेलवे स्टेशन लौटी। सभी लेखक आज बस से बाबा भलकू के पुश्तैनी गांव झाझा जाएंगे। हिमालय मंच के अध्यक्ष एसआर हरनोट ने बताया कि कविता सत्र कैथलीघाट और कनोह रेलवे स्टेशनों के नाम पर आयोजित किए जिनकी अध्यक्षता डॉ. प्रेरणा ठाकरे, प्रसिद्ध कवयित्री एवं वरिष्ठ लेखिका डॉ. किरण सूद ने की। जगदीश बाली और दीप्ति सारस्वत ने मंच का संचालन किया। सोलन सत्र कथा संवाद के रूप में आयोजित किया जिसकी अध्यक्षता एसपी सिंह ने की।
इस यात्रा में डॉ. किरण सूद (देहरादून), डॉ. प्ररेणा ठाकरे (नीमच मध्य प्रदेश), राजेश अरोड़ा और रोमी अरोड़ा (कानपुर), ई. एसपी सिंह (पटना बिहार), सीमा असीम (बरैली), ज्योत्सना मिश्र, ज्योति बक्सी और गायत्री मनचंदा (नई दिल्ली), संदीप वैद्य (मुम्बई), रवि कुमार और अनिल शर्मा (बिलासपुर), लखविंदर सिंह (अमृतसर), रोशन जसवाल और विनोद रोहतकी (सोलन), जगदीश बाली और हितेंद्र शर्मा, डॉ. विजय लक्ष्मी नेगी, डॉ. अनिता शर्मा, डॉ. देवकन्या ठाकुर, लेखराज चौहान, जगदीश कश्यप, सुमन धनंजय, वीरेंद्र शर्मा, जगदीश गौतम, शांति स्वरूप शर्मा और यादव चंद शामिल रहे। यात्रा में संजय गेरा स्टेशन अधीक्षक, जोगिन्द्र सिंह वोहरा सहायक स्टेशन अधीक्षक, अमर सिंह ठाकुर मुख्य वाणिज्य निरीक्षक के सहयोग से आयोजित किया गया।
कंडाघाट में बनेगा बाबा भलखू द्वार : शांडिल
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने कहा कि शिमला-कालका रेल का इतिहास बाबा भलकू के साथ जुड़ा है। बाबा भलखू के प्रयासों से ही रेल लाइन का कार्य पूरा हुआ। कंडाघाट में बाबा भलकू के पुश्तैनी गांव की ओर जाने वाली सड़क पर उनकी स्मृति में बाबा भलकू द्वार की स्थापना की जाएगी। इनकी स्मृति पर रेल यात्रा की तर्ज पर ही संगोष्ठी और अन्य आयोजन भी किए जाएंगे।