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Himachal News: हिमाचल हाईकोर्ट ने कहा- सड़कें हैं या धूल के गुबार, अफसरों को अदालत में पेश होने के आदेश

Fri, 24 Apr 2026 09:30 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Fri, 24 Apr 2026 09:30 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि ये सड़कें हैं या धूल के गुबार हैं। खंडपीठ ने पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर इन चीफ, एनएचएआई के मुख्य अभियंता को व्यक्तिगत रूप से अगली सुनवाई के दौरान पेश होने का आदेश दिया है। पढ़ें पूरी खबर...

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Are These Roads or Clouds of Dust Officials Ordered to Appear in himachal high court
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों विशेष रूप से शिमला-ठियोग-नारकंडा हाईवे की दयनीय स्थिति पर कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

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खंडपीठ ने कहा कि ये सड़कें हैं या धूल के गुबार हैं। खराब सड़कों से न सिर्फ वाहनों को नुकसान हो रहा है, बल्कि उड़ती धूल से पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। खंडपीठ ने पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर इन चीफ, एनएचएआई के मुख्य अभियंता को व्यक्तिगत रूप से अगली सुनवाई के दौरान पेश होने का आदेश दिया है। अधिकारियों को एक स्पष्ट रोडमैप पेश करने को कहा है कि ढली से नारकंडा तक की सड़क कब तक पूरी तरह ठीक कर दी जाएगी। अदालत ने अब इस जनहित याचिका का दायरा बढ़ाते हुए ठियोग से नारकंडा तक की सड़क को भी शामिल कर लिया है। 

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मामले की सुनवाई 21 मई को होगी। विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट में बताया गया है कि फागू के पास 2-3 किलोमीटर का हिस्सा अभी भी खराब स्थिति में है। शिमला-ठियोग सड़क का अधिकतम हिस्सा ठीक कर दिया गया है। हाईकोर्ट ने नोट किया कि देरी से की गई मरम्मत के कारण सड़क की निचली परतें नष्ट हो चुकी हैं, जिससे हालिया काम के ज्यादा टिकने की उम्मीद नहीं है। रिपोर्ट में पूरी सड़क के पुनर्निर्माण की सिफारिश की गई है। खंडपीठ ने कहा कि राज्य के सुस्त रवैये की वजह से काम में देरी हो रही है और नुकसान लोगों को उठाना पड़ रहा। 
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अदालत ने कहा : पर्यटन और एप्पल बेल्ट पर इसका बुरा असर 
अदालत ने कहा कि यह राजमार्ग राज्य की एप्पल बेल्ट की जीवनरेखा है। यह किन्नौर व भारत-चीन सीमा (छितकुल-शिपकी ला) को भी जोड़ता है। सड़क की दयनीय स्थिति की वजह से पर्यटन और एप्पल बेल्ट पर बुरा असर पड़ रहा है। एचआरटीसी के घाटे का एक कारण भी खराब सड़कें हैं। कोर्ट ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि सड़कों की खस्ताहाल स्थिति के कारण निगम की बसों में टूट-फूट बढ़ रही है, जिससे राज्य का अपना परिवहन निगम भारी घाटे में चल रहा है।

बजट देने को तैयार, विभाग ने प्रस्ताव भेजने में की देरी : केंद्र 
केंद्र सरकार ने अदालत में हलफनामा दायर कर बताया कि राजमार्गों की बहाली के लिए केंद्र धन देने को तैयार है, लेकिन राज्य लोक निर्माण विभाग की ओर से प्रस्ताव भेजने में देरी की गई है। कोर्ट ने अधिकारियों के रवैये को लापरवाह करार दिया। 

केसीसी बैंक पूर्व सैनिक कर्मियों को भी दे पे प्रोटेक्शन का लाभ : कोर्ट 
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक को आदेश दिया है कि वह याचिकाकर्ता पूर्व सैनिक कर्मचारियों को भी उसी तर्ज पर पे प्रोटेक्शन का लाभ प्रदान करे, जैसा उनके ही अन्य साथी कर्मचारी को दिया गया है। यह लाभ उसी तिथि से लागू माना जाएगा, जिस तिथि से अन्य को दिया गया था। 

याचिकाकर्ता 2008 से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, इसलिए उन्हें सभी बकाया वित्तीय लाभ भी वास्तविक रूप में प्रदान किए जाएं। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि एक ही संस्थान के भीतर समान स्थिति वाले कर्मचारियों के साथ अलग-अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह आदेश सूरम सिंह और अन्य ने मामले में दिया है। याचिकाकर्ताओं को वर्ष 2002 में पूर्व सैनिक कोटे के तहत हेल्पर-कम-चपरासी के पद पर नियुक्त किया था।

उनके साथ ही नियुक्त हुए एक अन्य कर्मचारी दया किशन को बैंक ने साल 2007 में एक प्रस्ताव पारित कर सेना में दी गई सेवाओं के बदले पे प्रोटेक्शन का लाभ दे दिया था। जब याचिकाकर्ताओं ने इसी लाभ की मांग की, तो बैंक ने यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि दया किशन को यह लाभ गलती से दिया गया था और बैंक अपनी गलती दोहराना नहीं चाहता।

कांस्टेबलों की पदोन्नति पर उच्च स्तरीय कमेटी करेगी समीक्षा
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने  पुलिस कांस्टेबलों की पदोन्नति के मुद्दों पर एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि पुलिस कर्मियों की सेवा स्थितियों में सुधार और समयबद्ध पदोन्नति सुनिश्चित करना आवश्यक है। 
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