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Shimla News: सेब तैयार, मगर रास्ते लाचार

Sun, 05 Jul 2026 11:14 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jul 2026 11:14 PM IST
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Apples ready, but roads in bad shape.
ए फॉर एप्पल....सीरीज 4
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चौपाल, नेरवा, रामपुर और कोटखाई में बारिश से सड़कों की हालत दयनीय
ग्रामीण संपर्क मार्गों की बदहाली से करोड़ों की फसल पर मंडराया संकट
मैटलिंग और पैचवर्क अधूरा, बारिश में मंडियों तक सेब पहुंचाना मुश्किल
पिछले साल भी भारी बारिश से सड़कें क्षतिग्रस्त होने से सेब की फसल को मंडी पहुंचाने में आईं थी दिक्कतें
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सेब सीजन के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की खस्ताहाल स्थिति के कारण इस साल भी बागवानों को परेशानियों से जूझना पड़ेगा। सेब बहुल क्षेत्रों में बरसात शुरू होते ही सड़कों की हालत दयनीय होने लगी है। हालत यह है कि कई कच्ची सड़कें दलदल में तब्दील हो गई हैं। इसे देखते हुए बागवानों को अपनी फसल मंडियों तक पहुंचाने की चिंता सताने लगी है।
पिछले साल भी भारी बारिश के कारण बागवानों को सेब की फसल शिमला सहित दूसरे राज्यों की मंडियों तक पहुंचाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। समय पर सेब मंडियों तक नहीं पहुंचने के कारण बागवानों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। इस साल अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध के कारण बिटुमिन की आपूर्ति प्रभावित होने और कीमतों में वृद्धि के चलते सड़कों की मैटलिंग और पैचवर्क का काम भी नहीं हो पाया है। यही वजह है कि बरसात शुरू होने से पहले ही कई सड़कों पर गड्ढों की भरमार है, जबकि कच्ची सड़कें दलदल में तब्दील हो चुकी हैं।
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चौपाल, रामपुर, ननखड़ी, कोटखाई, रोहड़ू और जुब्बल के दुर्गम इलाकों में संपर्क मार्गों की हालत दयनीय है। हालांकि, इस साल पिछले साल के मुकाबले ढाई करोड़ सेब की पेटियां होने का अनुमान है। इसके बावजूद लाखों लोगों की आजीविका का आधार बनने वाली सेब की फसल पर खस्ताहाल सड़कों का संकट मंडरा रहा है।
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पंचायतों में सड़कें कच्ची
जिले के बागवानों के लिए सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि सेब की फसल पंचायतों के संपर्क मार्गों से होकर मुख्य सड़कों तक पहुंचती है और वहां से मंडियों में भेजी जाती है। पंचायत क्षेत्रों में ज्यादातर मार्ग कच्चे हैं या भूस्खलन के कारण अवरुद्ध हो जाते हैं। इस वजह से सेब की फसल को मुख्य सड़क तक पहुंचाना ही चुनौती बन जाता है। समय पर फसल मंडियों तक नहीं पहुंचने पर ट्रकों और पिकअप वाहनों में उसके खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।
पिछले साल भी संपर्क मार्गों के क्षतिग्रस्त होने के कारण काफी फसल वाहनों में ही खराब हो गई थी। हाल ही में जिला परिषद सदस्य अतुल ने भी उपायुक्त से मिलकर यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने प्रशासन को बताया था कि जब इस साल सड़कों पर पैचवर्क तक नहीं हुआ है तो सेब की फसल मंडियों तक कैसे पहुंचेगी।

अभी प्रदेश में मानसून ने दस्तक ही दी है। बारिश भी अधिक नहीं हुई है, लेकिन अगस्त में सेब सीजन के रफ्तार पकड़ने के साथ भारी बारिश की संभावना रहती है। ऐसे में सड़कों की खस्ताहाल स्थिति के कारण बागवानों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।
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