HP Apple Season: मंडियों में सेब की बिक्री में खेल शुरू, अलग-अलग दामों पर बेचा जा रहा छोटे व बड़े आकार का सेब
सेब की पैकिंग के लिए यूनिवर्सल कार्टन अनिवार्य तौर पर लागू कर बागवानों को राहत दी है, लेकिन आढ़तियों और लदानियों ने बागवानों के शोषण का अलग तरीका निकाल लिया है।
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हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस साल सेब की पैकिंग के लिए यूनिवर्सल कार्टन अनिवार्य तौर पर लागू कर बागवानों को राहत दी है, लेकिन आढ़तियों और लदानियों ने बागवानों के शोषण का अलग तरीका निकाल लिया है। मंडियों में छोटे और बड़े आकार के सेब को अलग-अलग दामों पर बेचा जा रहा है। हिमाचल में हमेशा से सेब की बिक्री औसत कीमतों पर होती आई है, लेकिन इस बार आढ़तियों और लदानियों ने मिलकर अलग कीमतों पर सेब खरीदना शुरू कर दिया है।
सूखे और बीमारियों की मार से इस साल छोटे आकार के सेब का उत्पादन अधिक है। इन दिनों मंडियों में सेब की बोलियां 3,000 से 4,000 रुपये बॉक्स लगने की वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही हैं। बागवान भी मंडी के ऑक्शन यार्ड पर उपज की ऊंची बोली से खुश नजर आते हैं, लेकिन जब आढ़ती बिक्री का पर्चा (कच्चा बिल) देता है तो उसमें बड़े आकार के सेब के चुनिंदा बॉक्स को ही ऊंचा रेट दर्शाया जाता है, छोटे आकार के सेब के बॉक्स के रेट 30 से 40 फीसदी कम कीमत पर खरीदे जाते हैं। हिमाचल विशेषकर शिमला जिले की मंडियों में यह खेल सबसे अधिक चल रहा है।
मनमानी करने वालों के होंगे लाइसेंस रद्द : वर्मा
मंडियों में सेब की बिक्री पुरानी व्यवस्था पर ही होगी। आढ़ती और लदानी अपने स्तर पर छोटे-बड़े सेब की कीमतें तय नहीं कर सकते। अधिकारियों को मंडियों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। सेब बेचने में अगर आढ़ती मनमानी कर रहे हैं तो बागवान इसकी शिकायत करें। दोषियों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे। -देवानंद वर्मा, चेयरमैन, एचपीएमसी शिमला एवं किन्नौर
बागवानों ने यूनिवर्सल कार्टन का किया समर्थन
शिमला। कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) की ओर से मंगलवार को ठियोग में स्थित पराला फल मंडी में बैठक का आयोजन किया गया। एपीएमसी सचिव पवन सैनी ने बैठक की अध्यक्षता की। यूनिवर्सल कार्टन भरने में बागवानो को हो रही कठिनाई के बारे में बात की गई, जिस पर बागवानों ने परेशानी होने से साफ इन्कार किया।
क्या है सेब की दर और गड बिक्री
छोटे और बड़े आकार के सेब को एक ही औसत रेट पर बेचने की व्यवस्था ‘दर’ है। बड़े आकार के सेब के मुकाबले छोटे सेब की कीमतों में कटौती गड बिक्री की व्यवस्था है। बगीचों में छोटे-बड़े दोनों आकार का सेब है। आकार के आधार पर कीमतें तय होने से बागवानों को नुकसान होता है।