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अपराजिता कार्यक्रम: नवजात के विकास के लिए दो साल तक दें संतुलित आहार

Fri, 05 Aug 2022 11:54 PM IST
शिमला ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: शिमला ब्यूरो Updated Fri, 05 Aug 2022 11:54 PM IST
सार

दो सालों में बच्चे का नर्वस सिस्टम और मस्तिष्क विकसित होता है। इसलिए उसे संतुलित आहार मिलना जरूरी है। यह जानकारी आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर डॉ. गीतांजलि सूद ने राजकीय कन्या महाविद्यालय (आरकेएमवी) में पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा विभाग और अमर उजाला के अपराजिता कार्यक्रम के तहत आयोजित शिविर में दी।

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Aparajita Program: Give balanced diet for two years for the development of the newborn
आरकेएमवी में अपराजिता कार्यक्रम। - फोटो : संवाद

विस्तार

नवजात के लिए छह माह तक सिर्फ मां का दूध आवश्यक होता है। इसके बाद दो साल तक नवजात के लिए उपलब्ध फूड के साथ मां का दूध नियमित रूप से दिया जाना आवश्यक है। इन दो सालों में बच्चे का नर्वस सिस्टम और मस्तिष्क विकसित होता है। इसलिए उसे संतुलित आहार मिलना जरूरी है। यह जानकारी आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर डॉ. गीतांजलि सूद ने राजकीय कन्या महाविद्यालय (आरकेएमवी) में पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा विभाग और अमर उजाला के अपराजिता कार्यक्रम के तहत आयोजित शिविर में दी। विश्व स्तनपान जागरूकता सप्ताह के तहत आयोजित इस शिविर में डॉ. गीतांजलि ने बताया कि मां का स्वस्थ होना और संतुलित आहार लेना भी जरूरी है।

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आयूष हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर शोघी की आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर डॉ. गीतांजलि सूद ने इस दौरान संतुलित आहार की जानकारी भी दी। कार्यक्रम में कॉलेज की कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. रुचि रमेश और डॉ. गोपाल चौहान और पोषण स्वास्थ्य शिक्षा विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योति पांडे भी मौजूद रहीं। डॉ. गीतांजलि ने बताया कि मां का पहला दूध (कोलोस्ट्रम) नवजात के लिए अमृत होता है। इसमें न्यूट्रीशियन और प्रोटीन जैसे आवश्यक पोषक तत्वों होते हैं।
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यह एक प्राकृतिक वैक्सीन का काम करता है जो बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। महिलाएं इन दो सालों में दूध को 25 डिग्री तक के तापमान में रखकर बच्चे को पिला सकती हैं। फ्रीज में रखकर इसे 24 घंटे तक भी दिया जा सकता है। माताओं को स्तनपान ब्रेस्ट कैंसर से बचाता है। जागरूकता के अभाव में अभी भी तीन में से दो महिलाएं ही बच्चों को स्तनपान करवाती हैं।
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नाटक से बताया मां के दूध का महत्व
पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा विभाग की छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक से मां के दूध का महत्व बताया। नुक्कड़ नाटक में सरिता, नाजनी, ममता, प्रियंका, सपना, ज्योति, रोली, परीक्षा, महिमा, अनुष्का, हर्षिता, रंजना और राखी ने अभिनय किया।

पहला दूध आराम से हो जाता है हजम
कॉलेज की कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. रुचि रमेश ने डॉ. गितांजलि से सवाल किया कि यह भ्रांति है कि मां का पहला दूध बच्चे को हजम नहीं होता। इस पर डॉ. गितांजली ने कहा कि मां का पहला दूध गाड़ा जरूर होता है लेकिन यह बच्चे को आराम से हजम हो जाता है। यह बच्चे के लिए अमृत से कम नहीं होता, इसे जरूर पिलाना चाहिए।

सोते वक्त कभी दूध न पिलाओ
शिक्षिका डॉ. सरोज ने सवाल किया कि बच्चा दूध बाहर क्यों उछालता है। इस पर डॉ. गितांजलि ने कहा कि दूध बच्चे को सही दिशा में गोद में लिटाकर पिलाना जरूरी है। गलत पोजिशन में दूध पिलाने से ऐसा हो जाता है। मां को नींद आ जाने पर बच्चे की दूध पीते हुए मौत तक हो जाती है, इसलिए एहतियात बरतना जरूरी है।


छात्राओं के काम आएगी यह जानकारी
पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा विभाग की अध्यक्ष डॉ. ज्योति पांडे ने कहा कि जागरूकता कार्यक्रम में दी गई जानकारी छात्राओं को जीवन भर काम आएगी। डॉ. गितांजलि ने स्तनपान को लेकर जो भी भ्रांतियां थीं उसे दूर करने के साथ महत्वपूर्ण जानकारी दी है। यह छात्राओं के लिए उपयोगी है।

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