डीसी के माफी मांगने के बाद भी बलि पर अड़े देवता
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अंतरराष्ट्रीय मंडी शिवरात्रि महोत्सव में जिला प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उपायुक्त ने जिन कारदारों को कमरूनाग को उनके मूल स्थान पर मनाने के लिए भेजा था, वे बैरंग लौट आए हैं।
कमरूनाग देवता के मूल स्थल कांढी (धंग्यारा) पहुंचकर निर्मल सिंह ठाकुर ने पूछ डलवाई तो देववाणी में पशु बलि प्रथा को बहाल करने के लिए कहा गया।
निर्मल ने दावा किया है कि देववाणी में कमरूनाग ने कहा - ‘मेरे साथ मेरे रक्षक देवता (गण) जब चलते हैं तो उनके लिए बलि होना अनिवार्य है। गण मुझे असुरी शक्तियों से बचाते हैं।
पशु बलि न हुई तो आएंगी प्राकृतिक आपदाएं
कहा गया कि पशु बलि न हुई तो हरियान बीमारियों, अकाल, सूखा और प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के लिए तैयार रहें। देववाणी में कमरूनाग की इस तरह की नाराजगी से खलबली मच गई है।
सर्व देवता कमेटी के प्रधान शिवपाल शर्मा का कहना है कि बलि प्रथा से कमरूनाग ही नहीं बल्कि अन्य देवता भी निराश हैं। उन्होंने कहा कि जब तक बलि प्रथा से रोक नहीं हटती, तब तक देव समाज का आंदोलन जारी रहेगा।
उधर, कमरूनाग के गूर धर्म दत्त ने कहा कि बड़ादेव को मनाना देव कारदारों और प्रशासन के बस में नहीं है। उन्होंने कहा कि मूल स्थल में भी देव कमरूनाग ने बलि प्रथा को बहाल करने के लिए कहा है।