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Shimla News: मिड-डे-मील वर्कर यूनियन ने पोलिंग पार्टियां के लिए खाना बनाने का किया विरोध
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यूनियन की मांग, चुनाव आयोग फिर करे विचार, परेशानी में डाले जा रहे वर्कर
पोलिंग पार्टियों को दिया जाता है पैसा, वर्करों की ओर नहीं देता है कोई ध्यान
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश मिड-डे-मील वर्कर्स यूनियन ने निर्वाचन आयोग की ओर से पोलिंग पार्टियों के लिए खाना बनाने के फैसले का विरोध किया है। यूनियन ने निर्वाचन आयोग को फैसले पर फिर से विचार करने का आग्रह किया है। पंचायत चुनाव की घोषणा के बाद शिक्षा निदेशक को यूनियन ने ज्ञापन भी दिया था। मांग की गई थी कि पंचायत चुनाव में पोलिंग पार्टी के लिए खाना बनाने के लिए मिड-डे-मील वर्करों की ड्यूटी नहीं लगाई जाए।
साथ ही शिक्षा निदेशक ने आश्वासन दिया था कि निर्वाचन आयोग से विषय पर बात की जाएगी। इसके बाद भी चुनाव में जाने वाली पोलिंग पार्टियों के लिए खाना बनाने का जिम्मा मिड-डे-मील वर्करों को दिया गया है। इसका कोई अतिरिक्त वेतन नहीं दिया जाता। यूनियन के अध्यक्ष संदीप ने कहा कि चुनाव कार्य में लगे सभी कर्मचारी को वेतन दिया जाता है लेकिन मिड-डे-मील वर्करों की ओर कोई ध्यान तक नहीं दिया जाता है। ऐसे में काफी परेशानी का सामना वर्करों को करना पड़ता है और बेवजह परेशानी में डाला जा रहा है। यूनियन ने बताया कि मिड-डे मील अधिकतर महिलाएं हैं और रात 10:00 बजे तक महिलाओं के लिए खाना बनाना संभव नहीं है। यूनियन ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि पंचायत चुनावों में मिड-डे मेल वर्करों की ड्यूटी न लगाई जाए।
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पोलिंग पार्टियों को दिया जाता है पैसा, वर्करों की ओर नहीं देता है कोई ध्यान
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश मिड-डे-मील वर्कर्स यूनियन ने निर्वाचन आयोग की ओर से पोलिंग पार्टियों के लिए खाना बनाने के फैसले का विरोध किया है। यूनियन ने निर्वाचन आयोग को फैसले पर फिर से विचार करने का आग्रह किया है। पंचायत चुनाव की घोषणा के बाद शिक्षा निदेशक को यूनियन ने ज्ञापन भी दिया था। मांग की गई थी कि पंचायत चुनाव में पोलिंग पार्टी के लिए खाना बनाने के लिए मिड-डे-मील वर्करों की ड्यूटी नहीं लगाई जाए।
साथ ही शिक्षा निदेशक ने आश्वासन दिया था कि निर्वाचन आयोग से विषय पर बात की जाएगी। इसके बाद भी चुनाव में जाने वाली पोलिंग पार्टियों के लिए खाना बनाने का जिम्मा मिड-डे-मील वर्करों को दिया गया है। इसका कोई अतिरिक्त वेतन नहीं दिया जाता। यूनियन के अध्यक्ष संदीप ने कहा कि चुनाव कार्य में लगे सभी कर्मचारी को वेतन दिया जाता है लेकिन मिड-डे-मील वर्करों की ओर कोई ध्यान तक नहीं दिया जाता है। ऐसे में काफी परेशानी का सामना वर्करों को करना पड़ता है और बेवजह परेशानी में डाला जा रहा है। यूनियन ने बताया कि मिड-डे मील अधिकतर महिलाएं हैं और रात 10:00 बजे तक महिलाओं के लिए खाना बनाना संभव नहीं है। यूनियन ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि पंचायत चुनावों में मिड-डे मेल वर्करों की ड्यूटी न लगाई जाए।
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