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सैकड़ों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने 24 घंटों तक यहां डाला डेरा, घेरा सचिवालय

Fri, 08 Jun 2018 09:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Fri, 08 Jun 2018 09:22 AM IST
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Anganwadi Workers & Helpers Union two days strike in himachal

आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन संबद्ध सीटू ने वीरवार को प्रदेश सचिवालय का घेराव किया। वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर प्रदेश भर से आईं सैकड़ों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सचिवालय के बाहर 24 घंटे का डेरा डाला है।

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शुक्रवार दोपहर तक कार्यकर्ताओं की हड़ताल जारी रहेगी। उधर, हड़ताल के चलते वीरवार को प्रदेश के करीब 15 हजार आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहे। इन केंद्रों पर ताला लटकने से नौनिहालों को न तो पोषाहार मिला और न ही पढ़ाई हो सकी। शुक्रवार को भी केंद्र बंद ही रहेंगे।
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वीरवार सुबह आंगनबाड़ी कर्मी पंचायत भवन शिमला में एकत्रित होकर हाईकोर्ट और ओक ओवर से होते छोटा शिमला पहुंचीं। इस दौरान आंगनबाड़ी कर्मियों की भारी भीड़ के चलते सड़क जाम हो गई। 

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लोगों को कई परेशानियाें का सामना करना पड़ा

Anganwadi Workers & Helpers Union two days strike in himachal
ट्रैफिक जाम लगने से लोगों को कई परेशानियाें का सामना करना पड़ा। छोटा शिमला में जनसभा को संबोधित करते हुए आंगनबाड़ी यूनियन अध्यक्ष खिमी भंडारी और महासचिव राजकुमारी ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार समेकित बाल विकास योजना को खत्म करने की साजिश रच रही है।

आंगनबाड़ी के बजट को पिछले चार वर्षों में बीस हजार करोड़ से घटाकर लगभग आधा कर दिया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शपथपत्र दायर करके आंगनबाड़ी केंद्रों को मिलने वाली बच्चों की राशि को उनकी माताओं के खाते में डालने की मांग की है।

इससे आंगनबाड़ी केंद्र बंद हो जाएंगे। केंद्र सरकार ने देश के ग्यारह हजार आंगनबाड़ी केंद्र निजी कंपनी के हवाले करके निजीकरण व ठेकेदारी प्रथा की शुरुआत कर दी है। 

सरकारों ने आंगनबाड़ी कर्मियों से किया भेदभाव

Anganwadi Workers & Helpers Union two days strike in himachal

मध्य प्रदेश व राजस्थान की भाजपा सरकारों ने लगभग सात हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद कर दिया है। उन्होंने कहा है कि हिमाचल प्रदेश में सत्तासीन रही सभी सरकारों ने हमेशा ही आंगनबाड़ी कर्मियों से भेदभाव किया है।

इसी कारण केरल, पुड्डुचेरी, हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक, तेलंगाना व महाराष्ट्र के मुकाबले हिमाचल में बहुत कम वेतन दिया जाता है। केरल में साढ़े बारह हजार वेतन दिया जाता है। पड़ोसी राज्य हरियाणा में वेतन साढ़े ग्यारह हजार है।

ज्यादातर राज्यों में पेंशन दी जाती है। पूरे देश में सबसे कम वेतन हिमाचल में दिया जाता है। उन्हें ग्रेच्युटी व पेंशन नहीं दी जाती। वर्षों तक नेशनल रूरल हेल्थ मिशन का पैसा नहीं दिया जाता है। जनसभा को सीटू के राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर ठाकुर, सीटू नेता प्रेम गौतम, जगत राम, विजेंद्र मेहरा, सुमित्रा,

लज्या देवी, वीना, नीलम, पिंगला गुप्ता, आशा, चंपा, राजकुमारी, निर्मला, आरती, मीना, सरोज, आशु भारती, हिमाचल किसान सभा राज्य महासचिव व सीटू के पूर्व राज्य अध्यक्ष व विधायक राकेश सिंघा, डॉ. कुलदीप तनवर, रीना तनवर ने भी संबोधित किया।

ये हैं मांगें

Anganwadi Workers & Helpers Union two days strike in himachal

हरियाणा की तर्ज पर वेतन और सुविधाएं दी जाएं 
तीन हजार रुपये पेंशन दी जाए। रिटायरमेंट पर 2 लाख रुपये ग्रेच्युटी दी जाए 
मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों में कार्यरत कर्मियों को समान वेतन दिया जाए
मिनी केंद्रों को आंगनबाड़ी केंद्र के रूप में अपग्रेड किया जाए
एनआरएचएम की वर्ष 2013 से लंबित राशि का तुरंत भुगतान किया जाए 
आंगनबाड़ी कर्मियों की रिटायरमेंट आयु 65 वर्ष की जाए

मंत्री राजीव सैजल को सौंपा मांगपत्र
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री राजीव सैजल से सचिवालय में मुलाकात कर उन्हें मांगपत्र सौंपा। मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। 

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