शिमला में 250 करोड़ से अगले चार सालों में होंगे ये बड़े काम
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अमृत मिशन के तहत राजधानी शिमला को अगले चार सालों में कुल 250 करोड़ रुपये मिलेंगे। वित्त वर्ष 2015-16 के लिए शिमला को 90 करोड़ और 2016-17 के लिए 70 करोड़ रुपये मंजूर हो चुके हैं। शिमला में अमृत मिशन योजना का पहला साल पूरा होने के उपलक्ष्य पर शनिवार को रोटरी क्लब में आयोजित बैठक के दौरान निगम आयुक्त पंकज राय ने यह जानकारी दी। अध्यक्षता महापौर संजय चौहान ने की। उपमहापौर टिकेंद्र पंवर सहित पार्षद और निगम के विभागाध्यक्ष मौजूद रहे।
उन्होंने बताया कि अमृत मिशन के तहत 24 घंटे सातों दिन पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना, हर घर को सीवरेज नेटवर्क से जोड़ना और एसटीपी अपग्रेड करना, नालों और नालियों की स्थिति में सुधार और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में भी सुधार जैसे क्षेत्रों में काम किया जाना है। योजना के तहत शिमला को 2020 तक केंद्र सरकार से वित्तीय मदद मिलेगी। मौजूदा समय में राज्य स्तर पर गठित स्टेट लेबल टेक्निकल कमेटी ने 29.58 करोड़ के 14 प्रोजेक्टों को मंजूरी दे दी है।
इनमें जलापूर्ति के 6, सीवरेज और एसटीपी मैनेजमेंट के 3, ड्रेनेज के 2, अर्बन ट्रांसपोर्ट का एक और ग्रीन स्पेस के दो प्रोजेक्ट शामिल हैं। जलापूर्ति, सीवरेज कनेक्टिविटी और एसटीपी मैनेजमेंट के 9 प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने के एवज में आईपीएच को पैसा देने का निर्णय लिया गया था लेकिन अब सरकार ने पानी और सीवरेज व्यवस्था नगर निगम के अधीन देने का फैसला ले लिया है।
इसलिए पैसा ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। एससी आईपीएच को नोडल आफिसर बना कर उनके माध्यम से यह काम करवाए जाएंगे। बैठक में निगम पार्षद रजनी सिंह, शैलेंद्र चौहान, भारती सूद, नरेंद्र ठाकुर और कांता स्याल सहित अन्य पार्षद उपस्थित रहे।
अमृत मिशन के तहत पहले दस राज्यों में आने का लक्ष्य
आयुक्त पंकज राय ने बताया कि अमृत मिशन के तहत हिमाचल को पहले 10 राज्यों में स्थान दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसी कड़ी में मिशन के तहत बताए गए रिफार्म को गंभीरता से लेते हुए काम किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार की ओर से 28 रिफार्म बताए गए हैं जिनमें से शिमला ने 26 रिफार्म पूरे कर लिए हैं। रिफार्म पूरे होने की स्थिति में शिमला को 2.3 करोड़ की अतिरिक्त विकास राशि मिलेगी।
-आयुक्त ने अतिरिक्त मुख्य सचिव को दिया श्रेय
बैठक के दौरान निगम आयुक्त पंकज राय ने अमृत मिशन में शिमला के बेहतर प्रदर्शन का श्रेय शहरी विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा नंदा को दिया। उन्होंने कहा कि सरकार के स्तर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव के सहयोग से ही निगम को अमृत मिशन में हर संभव मदद मिल पाई है।
- अमृत मिशन के तहत अब तक हुए काम
शहर में सीवरेज नेटवर्क विस्तार पर काम शुरू
पानी की लाइनों में लीकेज दुरुस्त करने का काम शुरू
स्नोडन पंप हाउस के पंप बदले गए
पार्किंग निर्माण के लिए कर दिए गए हैं टेंडर
पानी के छह वाटर टैंकर खरीदने की तैयारी
बर्फ हटाने के लिए खरीदी जा रही है राबट मशीन
‘इगो प्राब्लम रहेगी तो नहीं होगा काम’
अमृत मिशन योजना में शिमला का पहला साल पूरा होने पर आयोजित बैठक के दौरान सरकार और नगर निगम के बीच अप्रत्यक्ष रूप से चली आ रही खींचतान खुल कर सामने आ गई। बैठक में सरकार की प्रतिनिधि के रूप में पहुंची अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) मनीषा नंदा और नगर निगम के मेयर संजय चौहान ने परोक्ष रूप से एक दूसरे पर जमकर तंज कसे।
एसीएस ने मेयर को सलाह देते हुए कहा कि ‘इगो प्राब्लम होगी तो कोई काम नहीं होगा’। उधर मेयर ने कहा कि ‘पीलिया फैलने के बाद नगर निगम की पहल से ही सरकार ने पहली बार शिमला ही नहीं पूरे प्रदेश में पानी की क्वांटिटी के साथ क्वालिटी पर फोकस करना शुरू किया है। नगर निगम को इसका श्रेय मिलना चाहिए।’
मनीषा नंदा ने कहा कि शहर के विकास में सरकार कभी हस्तक्षेप नहीं करती। सरकार ने हमेशा निगम के हितों को ध्यान में रखा है, इसलिए निगम को भी आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमृत मिशन में असली काम तो अब शुरू होगा क्योंकि अब प्रोजेक्ट मूर्त रूप लेगा। पब्लिक को काम नहीं दिखा तो नगर निगम के साथ सरकार की भी बदनामी होगी।
पब्लिक जन प्रतिनिधियों से तो जवाब मांगेगी ही, अधिकारियों से भी हिसाब मांगा जाएगा। एसीएस ने नगर निगम को शिमला शहर को मिली विरासत सहेजने की सीख दी और पर्यावरण की अनदेखी न करने को लेकर आगाह किया। मेयर संजय चौहान ने कहा कि शहर के विकास के लिए सरकार और नगर निगम के बीच सही तालमेल जरूरी है, लेकिन कई मामलों में सरकार नगर निगम को परमिशन देने में छह महीने से एक साल का वक्त लगा रही है।
पीलिया से नगर निगम को बड़ा सबक मिला, इससे बहुमूल्य जिंदगियों का नुकसान भी हुआ। मेयर ने कहा कि अमृत मिशन में सुझाए गए सुधारों को लेकर अगर सरकार अपना हिस्से का काम निर्धारित समय पर कर देेती है तो केंद्र सरकार से नगर निगम अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि हासिल करने में भी कामयाब हो जाएगा। सरकार का सहयोग मिले तो अमृत की तरह स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में भी नगर निगम अव्वल रहेगा।
‘फर्स्ट सिटीजन’ का बोलना तो जरूरी है’
एसीएस मनीषा नंदा के संबोधन के बाद कमिश्नर पंकज राय ने मेयर संजय चौहान से संबोधन के लिए आग्रह किया। मेयर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘मुझे भी बोलना पड़ेगा।’ इस पर मनीषा नंदा बोलीं ‘फर्स्ट सिटीजन’ का बोलना तो जरूरी है’।
‘मैडम बंगाल की हैं, माइक की जरूरत नहीं’
एसीएस मनीषा नंदा को जब संबोधन के लिए माइक आफर किया गया तो उन्होंने इंकार कर दिया। इस पर मेयर ने चुटकी लेते हुए कहा, मैडम बंगाल की हैं इन्हें माइक की जरूरत नहीं है। मनीषा नंदा ने जवाब दिया, ‘मेरी आवाज भी बुलंद है और आत्म विश्वास भी पूरा है।’