विष्णु के इस अवतार ने भस्म किए थे राजा के 60 हजार पुत्र
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देवी-देवताओं के महाकुंभ दशहरा उत्सव में सैकड़ों देवी-देवता पहुंचे हैं, लेकिन बशौणा के देवता कपिल मुनि तप के लिए विख्यात हैं। देवता अन्याय और अनुचित करने वालों को उसी क्षण सजा देते हैं। इस काम में देवता थोड़ी सी भी देर नहीं करते हैं। कपिल मुनि को भगवान विष्णु के 24 अवतारों में से छठा अवतार माना जाता है।
इन्हें सांख्य शास्त्र का जन्मदाता भी कहा जाता है। कपिल मुनि जब अपनी माता के गर्भ में थे तो उन्होंने माता को सांख्य शास्त्र का ज्ञान दिया था। मान्यता है कि कपिल मुनि तपस्या में लीन थे। इस दौरान उनके आश्रम के पास ही राजा सागर का घोड़ा घूम रहा था। राजा सागर के पुत्र जब घोड़े को ढूंढते हुए आए तो घोड़े को आश्रम में देखकर कपिल मुनि पर हमला कर दिया।
आंख खोलते ही भस्म कर दिए 60 हजार पुत्र
कपिल मुनि ने आंख खोलते ही राजा सागर के 60 हजार पुत्रों को भस्म कर दिया। उसके बाद राजा सागर के इन पुत्रों का उद्धार करने के लिए भागीरथ ने गंगा को धरती पर भेजा था। देवता कपिल मुनि करीब 60 साल तक दशहरा उत्सव में शरीक नहीं हुए थे। 60 साल के बाद वर्ष 2008 के बाद देवता उत्सव में प्रतिवर्ष शामिल हो रहे हैं।
देवता के कारदार चुन्ने राम शर्मा और भंडारी अमर चंद ने कहा कि देवता कपिल मुनि तप के लिए विख्यात है। दशहरा में देवता की अहम भूमिका रहती है। वहीं, 60 सालों तक देवता कपिल मुनि ने दशहरा उत्सव से दूरी बनाए रखी। इसके बाद देवता प्रतिवर्ष दशहरा में शामिल हो रहे हैं।