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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Amar Ujala Impact: Nauni University admits medicines are banned abroad; shifts responsibility to the Centre.

अमर उजाला इंपैक्ट: नौणी विवि ने माना विदेशों में प्रतिबंधित हैं दवाएं, केंद्र पर डाली जिम्मेवारी

Tue, 14 Jul 2026 07:57 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 14 Jul 2026 07:57 PM IST
सार

विदेशों में प्रतिबंधित दवाओं को स्प्रे शेड्यूल में शामिल करने का मामला उजागर होने के बाद विश्वविद्यालय ने यह सफाई दी है। यह भी तर्क दिया कि हर देश की अपनी स्वतंत्र नियामक व्यवस्था के अलावा भौगोलिक एवं जलवायु परिस्थितियां, कीट एवं रोगों की प्रकृति, मृदा की विशेषताएं और क्षेत्र विशिष्ट वैज्ञानिक जोखिम मूल्यांकन प्रणाली होती हैं।

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Amar Ujala Impact: Nauni University admits medicines are banned abroad; shifts responsibility to the Centre.
नौणी विश्वविद्यालयण् - फोटो : संवाद

विस्तार

डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी माना है कि विदेशों में कई दवाएं प्रतिबंधित हैं, पर इसकी सारी जिम्मेवारी केंद्र सरकार पर डाल दी है। विदेशों में प्रतिबंधित दवाओं को स्प्रे शेड्यूल में शामिल करने का मामला उजागर होने के बाद विश्वविद्यालय ने यह सफाई दी है। यह भी तर्क दिया कि हर देश की अपनी स्वतंत्र नियामक व्यवस्था के अलावा भौगोलिक एवं जलवायु परिस्थितियां, कीट एवं रोगों की प्रकृति, मृदा की विशेषताएं और क्षेत्र विशिष्ट वैज्ञानिक जोखिम मूल्यांकन प्रणाली होती हैं।

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इस संबंध में कुलपति डॉ. एचएस बवेजा की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में चर्चा के बाद विवि की निदेशक अनुसंधान डॉ. देवीना वैद्य की ओर से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई। स्प्रे शेड्यूल में शामिल कुछ सक्रिय रासायनिक अवयवों पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए उनकी तुलना यूरोपीय संघ के नियामकीय निर्णयों से की जा रही है, जहां क्लोरपाइरीफॉस, थियाक्लोप्रिड, ऑक्सी-डेमेटोन-मेथाइल, प्रोपिनेब, क्लोरोथैलोनिल, कार्बेन्डाजिम और जिराम जैसे सक्रिय अवयव या तो अनुमोदित नहीं हैं या उनकी स्वीकृति वापस ले ली गई है। कहा कि स्प्रे शेड्यूल में अनुशंसित हर पौध संरक्षण उत्पाद भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति की ओर से विधिवत पंजीकृत, अनुमोदित और सुरक्षित उपयोग के लिए स्वीकृत है।
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विवि यह भी स्पष्ट करना चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय कृषि-रसायन विनियमन का मूल सिद्धांत यह है कि यदि किसी कीटनाशक को यूरोपीय संघ में स्वीकृति प्राप्त नहीं है अथवा उसकी मंजूरी वापस ले ली गई है तो इसका यह अर्थ नहीं है कि वह भारत में प्रतिबंधित, असुरक्षित अथवा अनुपयुक्त है। इस आधार पर उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय व हिमाचल प्रदेश बागवानी विभाग की ओर से संयुक्त रूप से जारी वर्ष 2026 का सेब स्प्रे शेड्यूल पूर्णतया वैज्ञानिक आधार पर तैयार किया गया है और इसे लेकर किसी भी प्रकार की चिंता करने की जरूरत नहीं है। बागवानों से आग्रह है कि वे विवि की ओर से अनुशंसित स्प्रे शेड्यूल का पूर्ण विश्वास के साथ पालन करें।

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