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जिले में 44,131 किशोरों को लग चुकी है वैक्सीन की पहली डोज
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Amar ujala health Abhiyan shimla
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स्वास्थ्य विभाग स्कूलों में भी चला रहा है कोरोना टीकाकरण अभियान
34,372 किशोर को लगा गई है दूसरी डोज
15 से 18 साल के युवकों के टीकाकरण का ब्योरा
7,09,318 युवकों को पहली डोज लग चुकी है
6,68,905 युवकों को दूसरे डोज लगा चुका है विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिले में 12 से 14 साल के 44,131 किशोरों को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज लग चुकी है। स्वास्थ्य विभाग अब स्कूलों में किशोरों को दूसरी डोज लगवा रहा है। वहीं शहर के अस्पतालों में पंद्रह साल से अधिक आयु के युवकों को पहली तथा दूसरी डोज लग रही है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में अब तक 12 से 14 साल के 44,131 किशोरों को पहली और 34,372 को दूसरी डोज लग चुकी है। इसके अलावा 18 साल के आयु वर्ग के युवाओं को 7,09,318 को पहली और 6,68,905 को दूसरी डोज लग चुकी है।
दूसरे राज्यों में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में अभिभावक चाह रहे हैं बच्चों की वैक्सीनेशन जल्द पूरी हो जाए। स्वास्थ्य विभाग ने अब स्कूलों में उन बच्चों के लिए पहली डोज लगवाने की सुविधा प्रदान की है जिन्होंने कि बीते माह इस अभियान के तहत टीके नहीं लगवाए थे। ऐसे में वह बच्चे भी स्कूलों तथा अस्पतालों में टीका लगवाने आ रहे हैं।
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पाठशाला से छुट्टी करके आई
हूं टीका लगवाने : अनामिका
आप भी लगवाएं और हो जाएं सुरक्षित
शिमला। दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल (डीडीयू) में इलाज के लिए आए मरीजों की वीरवार को काफी भीड़ थी। इसी भीड़ के बीच नाभा की रहने वाली 15 साल की अनामिका भी खड़ी थी।
पूछने पर अनामिका ने बताया कि मुझे पहला टीका लगना है। बताया कि वह 9वीं की परीक्षा के कारण टीका नहीं लगवा पाई थी। आज स्कूल से छुट्टी करके अपनी सहेली के साथ टीका लगवाने अस्पताल आई हूं। छात्रा की सहेली भूमिका ने बताया कि उसने स्कूल में ही वैक्सीन लगवा ली थी। वैक्सीन लगवाने के बाद अनामिका ने कहा कि अन्य बच्चों को भी कोरोना वैक्सीन का टीका लगवा लेना चाहिए। इससे प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा सुरक्षित रहते हैं।
बच्चों ने कहा, टीके लगवाएंगे
ताकि आते रहें स्कूल : परमदेव
शिमला। संजौली स्कूल के शिक्षक परमदेव शर्मा ने बताया कि बच्चों में टीकाकरण को लेकर काफी उत्साह है। बच्चों ने स्वयं कहा था कि अगर लहर के दौरान बंदिशें बढ़ती हैं तो वह घरों से स्कूल नहीं आ पाएंगे। इसलिए पढ़ाई बाधित न हो तो उन्होंने स्कूलों में अपना टीकाकरण करवाया।
महामारी के पहले और दूसरे दौर में काफी भय था। हल्का सा जुकाम आने पर बच्चाें से दूरी बनानी पड़ती थी। अब स्कूलों में ऐसा नहीं है। टीकाकरण के बाद बच्चों और लोगों की सोच में सकारात्मक बदलाव आया है।
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34,372 किशोर को लगा गई है दूसरी डोज
15 से 18 साल के युवकों के टीकाकरण का ब्योरा
7,09,318 युवकों को पहली डोज लग चुकी है
6,68,905 युवकों को दूसरे डोज लगा चुका है विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिले में 12 से 14 साल के 44,131 किशोरों को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज लग चुकी है। स्वास्थ्य विभाग अब स्कूलों में किशोरों को दूसरी डोज लगवा रहा है। वहीं शहर के अस्पतालों में पंद्रह साल से अधिक आयु के युवकों को पहली तथा दूसरी डोज लग रही है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में अब तक 12 से 14 साल के 44,131 किशोरों को पहली और 34,372 को दूसरी डोज लग चुकी है। इसके अलावा 18 साल के आयु वर्ग के युवाओं को 7,09,318 को पहली और 6,68,905 को दूसरी डोज लग चुकी है।
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दूसरे राज्यों में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में अभिभावक चाह रहे हैं बच्चों की वैक्सीनेशन जल्द पूरी हो जाए। स्वास्थ्य विभाग ने अब स्कूलों में उन बच्चों के लिए पहली डोज लगवाने की सुविधा प्रदान की है जिन्होंने कि बीते माह इस अभियान के तहत टीके नहीं लगवाए थे। ऐसे में वह बच्चे भी स्कूलों तथा अस्पतालों में टीका लगवाने आ रहे हैं।
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पाठशाला से छुट्टी करके आई
हूं टीका लगवाने : अनामिका
आप भी लगवाएं और हो जाएं सुरक्षित
शिमला। दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल (डीडीयू) में इलाज के लिए आए मरीजों की वीरवार को काफी भीड़ थी। इसी भीड़ के बीच नाभा की रहने वाली 15 साल की अनामिका भी खड़ी थी।
पूछने पर अनामिका ने बताया कि मुझे पहला टीका लगना है। बताया कि वह 9वीं की परीक्षा के कारण टीका नहीं लगवा पाई थी। आज स्कूल से छुट्टी करके अपनी सहेली के साथ टीका लगवाने अस्पताल आई हूं। छात्रा की सहेली भूमिका ने बताया कि उसने स्कूल में ही वैक्सीन लगवा ली थी। वैक्सीन लगवाने के बाद अनामिका ने कहा कि अन्य बच्चों को भी कोरोना वैक्सीन का टीका लगवा लेना चाहिए। इससे प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा सुरक्षित रहते हैं।
बच्चों ने कहा, टीके लगवाएंगे
ताकि आते रहें स्कूल : परमदेव
शिमला। संजौली स्कूल के शिक्षक परमदेव शर्मा ने बताया कि बच्चों में टीकाकरण को लेकर काफी उत्साह है। बच्चों ने स्वयं कहा था कि अगर लहर के दौरान बंदिशें बढ़ती हैं तो वह घरों से स्कूल नहीं आ पाएंगे। इसलिए पढ़ाई बाधित न हो तो उन्होंने स्कूलों में अपना टीकाकरण करवाया।
महामारी के पहले और दूसरे दौर में काफी भय था। हल्का सा जुकाम आने पर बच्चाें से दूरी बनानी पड़ती थी। अब स्कूलों में ऐसा नहीं है। टीकाकरण के बाद बच्चों और लोगों की सोच में सकारात्मक बदलाव आया है।