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‘मेरे पापा, मेरे हीरो’... बच्चे बोले, थैंक्स ‘अमर उजाला’
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Mon, 30 Jun 2014 09:22 AM IST
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‘अमर उजाला’ की ओर से फादर्स डे पर करवाई गई लेखन प्रतियोगिता ‘मेरे पापा मेरे हीरो’ के विजेता बच्चों को रविवार को सम्मानित किया गया। ‘अमर उजाला’ के शिमला कार्यालय में कार्यक्रम में प्रतिभागी बच्चे अपने पिता के साथ शामिल हुए।
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बच्चों ने पापा के प्रति प्यार जताने का मौका देने पर ‘अमर उजाला’ का आभार जताया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने अपने अनुभव ‘अमर उजाला’ के साथ साझा किए। बच्चों के अभिभावकों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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इस दौरान बच्चों ने केक काटकर पापा को खिलाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ‘अमर उजाला’ के स्थानीय संपादक दया शंकर शुक्ला ‘सागर’ ने की। उन्होंने कहा कि मात्र खबरें प्रकाशित करना ही ‘अमर उजाला’ का कर्तव्य नहीं है, बल्कि समाज को दिशा देना भी हमारी जिम्मेवारी है।
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‘अमर उजाला’ ने अभी एक शुरूआत की है। आने वाले दिनों में इस प्रकार के कार्यक्रमों को विस्तार दिया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया।
अमर उजाला की लेखन प्रतियोगिता ‘मेरे पापा मेरे हीरो’ में सैकड़ों बच्चों ने अपनी एंट्रियां भेजीं। इनमें से 15 श्रेष्ठ एंट्रियां भेजने वाले बच्चों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर ‘अमर उजाला’ प्रसार विभाग के सह प्रबंधक भूपेंद्र सिंह भी उपस्थित रहे।
इन बच्चों को किया गया पुरस्कृत
आस्था जसवाल, अनुराधा, संजना सिंह, वत्सल चौहान, भूमिका चौहान, रुचिका गौतम, भव्या ठाकुर, रजत शर्मा, प्राची चौहान, मिताली माल्टा, अनिल शर्मा, शारवी सूद, सत्यम अग्रवाल, रणवीर और श्रेया।
पापा दिखाते हैं सही राह
भूमिका चौहान ने कहा कि मेरे पापा दुनिया के सबसे अच्छे पापा हैं। गलत काम करने पर जहां मुझे डांटते हैं वहीं अच्छा काम करने की राह भी दिखाते हैं।
मेरे पापा मेरे रोल माडल
प्राची चौहान ने कहा कि मेरे पापा मेरे रोल माडल हैं। मेरे पापा मुझे बहुत प्यार करते हैं। मेरी गलतियों पर मेरे पापा पर्दा नहीं डालते हैं। मुझे गलतियों से सबक लेने को कहते हैं।
पापा से सीखे सामाजिक कार्य
वत्सल चौहान ने कहा कि मैं अपने पापा की तरह बनना चाहता हूं। मेरे पापा समाज के उत्थान के कार्य करते हैं। मैं भी इनकी तरह बनकर सामाजिक कर्तव्य निभाना चाहता हूं।