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अमर उजाला अभियान शिक्षा : बिना पढ़ाई वसूली फीस, निजी स्कूलों से हुआ मोहभंग

Wed, 30 Mar 2022 12:48 AM IST
शिमला ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, ऊना
अमर उजाला नेटवर्क, ऊना Published by: शिमला ब्यूरो Updated Wed, 30 Mar 2022 12:48 AM IST
सार

कोरोना महामारी के दौरान रावमापा बसाल में छठी से बारहवीं तक निजी स्कूलों से 155 बच्चों ने दाखिला लिया। वहीं, रावमापा रायंसरी में निजी स्कूलों से 27 बच्चे, रावमापा पालक वाह में 13 विद्यार्थी, रावमापा हरोली में 92 बच्चे, रावमापा स्कूल अंबेहड़ा में 17 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया।

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Amar Ujala Abhiyan Education: Without recovery fees, disillusioned with private schools
अमर उजाला शिक्षा अभियान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना काल समाज के कई वर्गों के लिए विपरीत परिस्थितियां लेकर आया तो वहीं शिक्षा का क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा। इस दौरान जहां पहली बार बच्चों को दो साल से अधिक समय तक ऑनलाइन पढ़ाया गया, वहीं इस समयावधि में कई अभिभावकों का निजी स्कूलों से मोहभंग हुआ और सरकारी स्कूलों में दाखिले की संख्या बढ़ी है। इस बड़े बदलाव का मुख्य कारण निजी और सरकारी स्कूलों में फीस के भारी अंतर को माना गया। एक ओर लोगों के कारोबार ठप थे तो वहीं दूसरी ओर निजी स्कूलों में फीस की मांग के चलते कई अभिभावकों ने बच्चों को सरकारी स्कूल में दाखिल करवाना उचित समझा। इसमें अधिकतर बच्चे ग्रामीण क्षेत्रों के रहे।

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जानकारी के अनुसार कोरोना महामारी के दौरान रावमापा बसाल में छठी से बारहवीं तक निजी स्कूलों से 155 बच्चों ने दाखिला लिया। वहीं, रावमापा रायंसरी में निजी स्कूलों से 27 बच्चे, रावमापा पालक वाह में 13 विद्यार्थी, रावमापा हरोली में 92 बच्चे, रावमापा स्कूल अंबेहड़ा में 17 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया।
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बारहवीं की छात्रा सिमरन ने बताया कि निजी स्कूलों में भी ऑनलाइन पढ़ाई चलती थी, लेकिन सरकारी स्कूल रायंसरी के प्रधानाचार्य कश्मीर सिंह ने नई पहल कर अपनी टीम के साथ बच्चों को गांव के वार्ड में इकट्ठा कर पढ़ाने की पहल की। कहा कि इसी से प्रेरित होकर उसने भी सरकारी स्कूल में दाखिला लिया, जो कि एक अच्छा फैसला रहा।
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कक्षा दसवीं के छात्र गुरमीत सिंह ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान बच्चों की पढ़ाई को लेकर सरकारी स्कूलों के अध्यापकों ने हर संभरव प्रयास किए। कहा कि उसी से प्रेरित होकर उसने सरकारी स्कूल में दाखिला लिया और काफी सिलेबस कवर किया।

सातवीं कक्षा के छात्र गोपाल का कहना है की महामारी के दौरान सरकारी स्कूलों के अध्यापक घर आकर बच्चों का मार्गदर्शन किया। साथ ही यहां पढ़ाई की कोई फीस नहीं लगी। कहा कि वह निजी स्कूल व सरकारी स्कूलों में कुल मिलाकर व्यवस्थाएं एक जैसी हैं।


आठवीं कक्षा के छात्र प्रमोद का कहना है कि अब प्राइवेट स्कूलों की तरह ही बच्चों को सरकारी स्कूलों में सभी सुविधाएं मिल रही हैं। कहा कि सबसे बड़ी राहत न के बराबर फीस है। कहा कि अभी तक का अनुभव अच्छा रहा है और भविष्य में भी सरकारी स्कूल में ही पढ़ाई का इरादा है।

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