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‘अल्फांसो’ से बदलेगी हिमाचल प्रदेश के मैदानी इलाकों की तकदीर

Sun, 30 Jul 2017 02:04 PM IST
हरीश चन्द्र/अमर उजाला, मंडी
हरीश चन्द्र/अमर उजाला, मंडी Updated Sun, 30 Jul 2017 02:04 PM IST
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Alphonso mango cultivation in plains of Himachal Pradesh

अब हिमाचल प्रदेश के मैदानी क्षेत्र के बागवान भी सबसे महंगी किस्म के आम की पैदावार करेंगे। बागवानी विभाग ने प्रदेश के बागवानों के लिए उत्तर प्रदेश और गुजरात से आम की अल्फांसो किस्म के पौधे मंगवाए हैं।

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इसी बरसात सीजन में बागवानों को अल्फांसो आम के पौधे रोपाई के लिए दिए जाएंगे। वर्तमान में प्रदेश भर में अल्फांसो आम का एक भी बाग नहीं है। हिमाचल में अगर यह ट्रायल सफल रहा तो विभाग योजना को विस्तार देगा।
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ऐसे में अल्फांसो आम की पैदावार बागवानों की कमाई के लिहाज सेब को टक्कर देती नजर आएगी।

बागवानी विभाग मंडी के उपनिदेशक अमर प्रकाश कपूर ने बताया कि जिला के बागवानों के लिए अल्फांसो आम के 1200 पौधे मंगवाए गए हैं।

बरसात में ही इन पौधों की रोपाई की जाएगी। अगर पौधे टिक जाते हैं तो आने वाले समय में और पौधे मंगवाए जाएंगे।

हापुस नाम से जाना जाता है अल्फांसो आम

Alphonso mango cultivation in plains of Himachal Pradesh

अल्फांसो आम को भारत में हापुस नाम से भी जाना जाता है। यह आम की एक खास किस्म है, जिसे मिठास, सुगंध और स्वाद के मामले में सबसे अच्छी किस्मों में से एक माना जाता है।

एक आम का वजन 150 ग्राम से लेकर 300 ग्राम तक होता है। अल्फांसो भारत का सबसे महंगा आम है। एक पेटी के कीमत 1200 रुपये तक होती है। एक पेटी में लगभग 12 से 14 आम ही होते हैं।

विदेश में अल्फांसो आम की भारी डिमांड
विदेश में भारत के अल्फांसो आम की काफी मांग है। देश के महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में अल्फांसो आम की अच्छी पैदावार होती है। इस आम की बड़ी खासियत यह है कि यह पकने के एक सप्ताह बाद तक भी खराब नहीं होता।

महाराष्ट्र के ही रत्नागिरी, गुजरात के वलसाड़ और नवसारी में सबसे अधिक पैदा होता है। देश से हर साल करीब 200 करोड़ का अल्फांसो आम केवल यूरोपीय देशों को निर्यात किया जाता है। इसके अलावा दुबई, सिंगापुर और मध्य एशिया के दूसरे देशों में भी इस का निर्यात होता है

दूसरे आम से है अलग
अल्फांसो आम को आमों का सरताज कहा जाता है। अल्फांसो की खासियत में देवगढ़ के बागों की जमीन और वहां की जलवायु का खास असर होता है। इस कारण अल्फांसो भारत के ही नहीं दुनिया के दूसरे आमों से पूरी तरह से अलग होता है। भारत के दूसरे इलाकों में भी बागवानों ने अल्फांसो आम के बाग लगाए हैं।

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