OMG! इन 21 स्कूलों का रिजल्ट चौंका देगा आपको
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हिमाचल के सरकारी स्कूलों में ही नहीं, बल्कि निजी स्कूलों में भी शिक्षा का बुरा हाल है। सरकार का ध्यान शिक्षा पर फोकस है, लेकिन परिणाम ठीक नहीं आ रहे हैं। स्कूल शिक्षा बोर्ड ने हाल ही में जमा दो का रिजल्ट निकाला है।
इसमें 21 सीनियर सेकेंडरी स्कूल ऐसे हैं, जहां सभी बच्चे फेल हैं। इनमें 10 सरकारी और 11 स्कूल गैर सरकारी हैं। छात्रों से जुड़ा मामला होने के कारण सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा से इन स्कूलों के अध्यापकों के साथ बैठक कर कार्रवाई करने को कहा है।
अब शिक्षा विभाग स्कूल अध्यापकों को नोटिस जारी कर रहा है। वर्तमान में प्रदेश में 1717 वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाएं हैं। इनमें 309 स्कूल ऐसे हैं, जिनका रिजल्ट 50 फीसदी से कम आया है। इन स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। यही नहीं, सरकार की ओर से अब इन स्कूलों का अगले 10 साल तक रिव्यू किया जाएगा।
6 स्कूलों में एक-एक छात्र, वे भी फेल
कुल 21 स्कूल, जहां सभी बच्चे फेल हैं। इनमें 6 स्कूल ऐसे हैं, जहां एक-एक बच्चा था। शिक्षा विभाग भी हैरान है कि स्कूल अध्यापक एक बच्चे को भी नहीं पढ़ा सका। प्रदेश के जिन स्कूलों का रिजल्ट 80 फीसदी से 100 फीसदी के बीच में रहा है, सरकार उन स्कूलों के प्रधानाचार्य को सम्मानित करेगी। सरकार से उन्हें प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा।
जानें किसका कितना खराब रहा रिजल्ट
निजी स्कूल धीरा में सभी 25 छात्र फेल, रावमापा मानगढ़ सिरमौर में सभी 38 बच्चे फेल, रावमापा कदौर सोलन में सभी 17 बच्चे फेल, रावमापा तरसूह में 58 में से 53 बच्चे फेल, कंडवाल स्कूल में 58 में से 47 बच्चे फेल, रावमापा चायल सोलन में 78 में से 68 बच्चे फेल, रावमापा पलोरा में 97 में से 81 बच्चे फेल, चंबा के रावमापा किहार में 63 में से 52 बच्चे फेल, कांगड़ा के रावमापा लंबागांव में 77 में से 65 छात्र फेल, आजाद पब्लिक स्कूल कोटखाई में 2 में से दोनों बच्चे फेल, हिम मॉडल स्कूल चढियार में 1 बच्चा था, वह भी फेल, राजीव मेमोरियल पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल सीना बल्ह में 3 में से तीनों फेल, रावमापा बनीखेत में 110 में से 89 बच्चे फेल।
देखें कितने स्कूलों का रिजल्ट रहा अच्छा
•225 स्कूलों में 100 फीसदी रिजल्ट
•280 स्कूलों में 90 से 100 फीसदी
•293 स्कूलों में 80 से 90 फीसदी
•229 स्कूलों में 70 - 80 फीसदी
• 212 स्कूलों में 60 - 70 फीसदी
•169 स्कूलों में 50-60 फीसदी
•108 स्कूलों में 40 - 50 फीसदी
• 83 स्कूलों में 30 से 40 फीसदी
• 63 स्कूलों में 20 -30 फीसदी
• 27 स्कूलों में 10 से 20 फीसदी
• 7 स्कूलों में 0-10 फीसदी
• 21 स्कूलों में 0 फीसदी