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हिमाचल की पेयजल योजनाओं में कई खामियां
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Mon, 07 Mar 2016 11:07 AM IST
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प्रदेश के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पानी की योजनाओं और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की स्थिति ठीक नहीं है।
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राजधानी शिमला में ही नहीं, बल्कि प्रदेश के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पानी की योजनाओं और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की स्थिति ठीक नहीं है। यह खुलासा आईपीएच विभाग के प्रमुख अभियंता आरके कंवर ने निरीक्षण रिपोर्ट में किया है। उन्होंने प्रदेश की कई पेयजल योजनाओं, प्रयोगशालाओं और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का मुआयना किया।
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इसके बाद सभी मुख्य अभियंताओं और अन्य अधीनस्थ अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। प्रमुख अभियंता ने निरीक्षण रिपोर्ट सरकार को सौंपी है। रिपोर्ट के अनुसार 26 जनवरी को निरीक्षण के समय हमीरपुर, नूरपुर और बिलासपुर में वाटर टेस्टिंग प्रोसीजर में कई कमियां देखी गईं। 26 जनवरी को ही एसटीपी ज्वालाजी के निरीक्षण में भी कमियां पाईं।
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ऊना प्रयोगशाला में कमियां ठीक करने को अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता को निर्देश दिए। 13 फरवरी को कांगड़ा, पालमपुर और धर्मशाला में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का निरीक्षण किया। यहां भी कई खामियां देखी गईं। धर्मशाला में वाटर टेस्टिंग प्रयोगशाला को दुरुस्त करने के लिए जरूरी निर्देश दिए। 14 फरवरी को जोगिंद्रनगर, सुंदरनगर और मंडी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का निरीक्षण किया।
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पाया कि इसमें भी सुधार जरूरी हैं। प्रमुख अभियंता आरके कंवर ने कहा कि इंस्पेक्शन के समय उन्होंने पाया कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों पर कुशल और अकुशल श्रमिकों को उन्हें नहीं दिया जा रहा है। उन्हें ये भरोसा दिलाया गया है कि श्रमिकों की व्यवस्था जल्दी होगी।
जहां महामारी का खतरा, वहां सुपरक्लोरिनेशन करें
आईपीएच विभाग के प्रमुख अभियंता आरके कंवर के मुताबिक निर्देश दिए हैं कि पीने योग्य पानी में प्रतिशत लीटर 0.25 मिलीग्राम क्लोरीन अवशेष ही रहें। जहां महामारी का खतरा है, वहां सुपरक्लोरिनेशन की जा सकती है। ब्लीचिंग पाउडर को इस तरह से डाला जाए कि इसे बनाने के तीन महीने के बाद ही इसका इस्तेमाल कर लिया जाए। इससे इसकी मजबूती कम नहीं होगी। ये भी सुनिश्चित करने को कहा कि हर रसासन पर अनिवार्य रूप से एक्सपायरी डेट हो।
सोलन और लालपानी के प्लांटों में भी कई कमियां
मल्याणा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निरीक्षण के दौरान अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता को निर्देश दिए कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की विस्तृत नमूना रिपोर्ट दी जाए। मेन कलेक्शन टैंक में लीकेज को रेक्टिफाई किया जाए। इसके लिए आधुनिक तकनीक अपनाई जाए। दो जनवरी 2016 से अश्वनी खड्ड से जलापूर्ति बंद कर दी है। व्हाइट वाशिंग समेत सभी तरह के रिपेयर के काम प्राथमिकता के आधार पर पूरा किए जाएं। सोलन और लालपानी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में कई कमियां पाई गई हैं, जिन्हें ठीक किया जा रहा है।