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किसानों ने छोड़ी मक्की की खेती, जिले में सिर्फ 6 फीसदी उपज

Sat, 10 Aug 2019 11:06 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Aug 2019 11:06 PM IST
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शिमला। पहाड़ों की मीठी और रसीली मक्की के भुट्टे अब बाजारों में खाने को नहीं मिल रहे। बंदरों की बढ़ती समस्या और नकदी फसलों में अधिक फायदा होने के कारण किसान मक्की की फसलें लगाने से किनारा करने लगे हैं। राजधानी के साथ लगते गांवों में तो किसानों ने मक्की लगाना ही छोड़ दी है। पहाड़ों में होने वाली मक्की मीठी और स्वादिष्ट होती है। लेकिन लोगों और सैलानियों को अब दूध से भरी वह स्वादिष्ट मक्की नहीं मिल रही। बाजारों में बिक रहे भुट्टे पंजाब और हरियाणा से आ रहे हैं।
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बंदरों के उत्पात के बाद किसानों ने यहां पारंपरिक मक्की की खेती करना बंद की दी है। किसान इसके बदले हरी सब्जियों की फसलें लगा रहे हैं। इसमें फायदा अधिक है तथा यह फसलें रोजी रोटी का जरिया भी बन रही हैं। पांच सालों की तुलना की जाए तो अब करीब 6 प्रतिशत किसान ही मक्की की खेती कर रहे हैं। 2016 में कृषि विभाग ने करीब 207. 97 क्विंटल मक्की का बीज किसानों को बेचा था। 2018-19 में सिर्फ 145 किलो बीज ही बिका। शिमला शहर के साथ लगते गांवों की अगर बात की जाए तो यहां पर किसानों ने मक्की की खेती करना ही बंद कर दी है। कृषि विभाग के मुताबिक किसानों ने अब सब्जियों की ओर रुख कर लिया है। पारंपरिक खेती की तुलना में सब्जियों में मुनाफा अधिक है। मक्की जैसी खेती को बंदर दूर से पहचान लेते है। ऐसे में बंदर झुंडों में आकर इस खेती को घंटों में ही नष्ट कर देते हैं। जिले बंदरों के अलावा सुअर, लोमड़ी और लावारिस पशुओं का प्रकोप भी अधिक है। जिला शिमला करीब 5091 लावारिस पशु हैं। इसके अलावा बंदरों और सुअर का प्रशासन के पास पूरा रिकार्ड नहीं है।
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सब्जियां उगाना फायदे का सौदा
मल्याणा के किसान काकू ने कहा कि उन्होंने करीब 15 साल पहले मक्की लगाना छोड़ दी है। इसका सबसे बड़ा कारण बंदर ही है। बंदर यहां की हर खेती को नष्ट कर रहे हैं। भट्ठाकुफर के किसान अमित ने कहा कि सब्जियों के कारोबार में अधिक आमदनी हो रही है। लोअर ढली के किसान किशोरी लाल ने बताया कि पारंपरिक खेती में मेहनत बहुत ज्यादा लगती है और आमदनी कम होती है। ऐसे में सब्जियों की खेती करना किसानों के लिए लाभकारी है।
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किसान नहीं कर रहे पारंपरिक खेती : भवानी
जिला कृषि अधिकारी मोहेंद्र सिंह भवानी ने कहा कि जिले के किसान बहुत कम लोग मक्की की खेती कर रहे हैं। कुछ लोग कर रहे हैं लेकिन अपने गुजारे लायक। शिमला का हर किसान विदेशी सब्जियों की ओर रुख कर रहे हैं।
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